डेस्क : वॉलमार्ट के स्वामित्व वाली ई-कॉमर्स कंपनी फ्लिपकार्ट का बहुप्रतीक्षित प्रारंभिक सार्वजनिक निर्गम (आईपीओ) फिलहाल टल सकता है। कंपनी अब बाजार में सूचीबद्ध होने की बजाय लाभप्रदता (प्रॉफिटेबिलिटी) हासिल करने पर अधिक ध्यान केंद्रित करेगी।
सूत्रों के अनुसार, वॉलमार्ट ने फ्लिपकार्ट प्रबंधन को निर्देश दिया है कि वह पहले अपने परिचालन को मजबूत करे और वित्तीय रूप से आत्मनिर्भर बने। इसके तहत कंपनी को वित्त वर्ष 2027 तक एबिटा स्तर पर ब्रेकईवन हासिल करने का लक्ष्य दिया गया है।
हाल ही में वॉलमार्ट के शीर्ष अधिकारियों की बेंगलुरु में फ्लिपकार्ट नेतृत्व के साथ हुई बैठक के बाद यह रणनीतिक बदलाव सामने आया है। बैठक में कंपनी के दीर्घकालिक विकास और वित्तीय योजना की समीक्षा की गई।
जानकारी के मुताबिक, फ्लिपकार्ट पहले आईपीओ लाने की दिशा में सक्रिय रूप से तैयारी कर रही थी, लेकिन अब वॉलमार्ट का रुख अधिक सतर्क दिखाई दे रहा है। कंपनी का फोकस तेज विस्तार की बजाय लागत नियंत्रण और मुनाफे को स्थिर करने पर है।
सूत्रों का यह भी कहना है कि फ्लिपकार्ट को अपने मासिक खर्चों में कटौती करने और कैश बर्न कम करने के निर्देश दिए गए हैं, ताकि वित्तीय स्थिति मजबूत हो सके।
यह पहली बार नहीं है जब वॉलमार्ट ने भारत में अपने डिजिटल कारोबार की लिस्टिंग योजनाओं को टाला हो। इससे पहले उसकी डिजिटल पेमेंट कंपनी फोनपे के आईपीओ को भी आगे बढ़ा दिया गया था।
फ्लिपकार्ट देश की सबसे बड़ी ई-कॉमर्स कंपनियों में से एक बनी हुई है और भविष्य में, जैसे ही कंपनी अपने वित्तीय लक्ष्य हासिल करेगी, आईपीओ की संभावना फिर से खुल सकती है।













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