नई दिल्ली:आईटी मिनिस्ट्री के सचिव ने साफ किया है कि कंपनियां और ट्रेडर्स आईटी हार्डवेयर, लैपटॉप, टैबलेट्स आदि इंपोर्ट कर सकती हैं। इनके इंपोर्ट पर कोई प्रतिबंध नहीं लगा है। इससे पहले, गुरुवार को सरकार की तरफ से जारी नोटिफिकेशन में कहा गया था कि लैपटॉप, टैबलेट, ऑल-इन-वन पर्सनल कंप्यूटर, अल्ट्रा स्मॉल फॉर्म फैक्टर (यूएसएफएफ) कंप्यूटर और सर्वर के आयात पर सुरक्षा कारणों से और घरेलू विनिर्माण को बढ़ावा देने की जरूरत को देखते हुए ‘अंकुश’ लगा दिया गया है।
इंपोर्ट के लिए लाइसेंस जरूरी
आईटी मिनिस्ट्री के सचिव ने मिंट को बताया है कि इस तरह के उत्पाद के इंपोर्ट के लिए अब लाइसेंस की जरूरत पड़ेगी। बिना लाइसेंस के इन सामानों का इंपोर्ट नहीं किया जा सकता है। कोई भी कंपनी DGFT से लाइसेंस के लिए आवेदन कर सकती है। कंपनियों को लाइसेंस भी 5 मिनट में इश्यू कर दिया जाएगा। बता दें, कंपनियों का लाइसेंस एक साल के लिए वैलिड रहेगा।
सचिव ने कहा कि PLI 2.0 के तहत रजिस्ट्रड 44 कंपनियों पर कोई प्रतिबंध नहीं है। इन कंपनियों में एचपी भी है।
क्या होता है ‘अंकुश’ लगाने का मतलब?
किसी उत्पाद के आयात को अंकुश की श्रेणी में डालने का मतलब है कि उनके आयात के लिए लाइसेंस या सरकार की अनुमति अनिवार्य होगी। बता दें, गुरुवार को जारी नोटिफिकेशन में कहा गया था ”लैपटॉप, टैबलेट, ऑल-इन-वन पर्सनल कंप्यूटर और सर्वर के आयात को तत्काल प्रभाव से ‘अंकुश’ की श्रेणी में डाल दिया गया है।”
चीन पर निर्भर है भारत
रिसर्च संस्था ग्लोबल ट्रेड रिसर्च इनिशिएटिव (जीटीआरआई) की एक रिपोर्ट के अनुसार, भारत का चीन से 65 प्रतिशत आयात सिर्फ तीन उत्पाद समूहों… इलेक्ट्रॉनिक्स, मशीनरी और जैविक रसायन तक सीमित है। रिपोर्ट में कहा गया कि भारत अपनी दैनिक जरूरतों तथा औद्योगिक उत्पादों मसलन मोबाइल फोन, लैपटॉप, कलपुर्जे, सौर सेल मॉड्यूल और आईसी के लिए चीन पर काफी हद तक निर्भर है।
भारतीय बाजार में बिकने वाले प्रमुख इलेक्ट्रॉनिक ब्रांड में एचसीएल, सैमसंग, डेल, एलजी इलेक्ट्रॉनिक्स, एसर, एप्पल, लेनोवो और एचपी शामिल हैं। भारत ने 2022-23 में लैपटॉप सहित 5.33 अरब डॉलर मूल्य के पर्सनल कंप्यूटर का आयात किया है। 2021-22 में यह आंकड़ा 7.37 अरब डॉलर रहा था।












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