नई दिल्ली : देश के मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत ने उनके नाम पर सोशल मीडिया पर फैलाए जा रहे एक कथित फर्जी और भ्रामक बयान पर कड़ी आपत्ति जताई है। उन्होंने इसे पूरी तरह असत्य, मनगढ़ंत और समाज में भ्रम फैलाने का प्रयास बताया है।
मुख्य न्यायाधीश की ओर से कहा गया कि उनके नाम से प्रसारित किया जा रहा कथित बयान न केवल झूठा है, बल्कि जानबूझकर सामाजिक तनाव पैदा करने की कोशिश का हिस्सा प्रतीत होता है। उन्होंने स्पष्ट किया कि किसी भी संवैधानिक पदाधिकारी के नाम से गलत उद्धरण या मनगढ़ंत सामग्री फैलाना गंभीर दुष्प्रचार है, जो कानून के शासन के खिलाफ है।
उन्होंने इस प्रकार की गतिविधियों को लोकतांत्रिक व्यवस्था और न्यायपालिका की विश्वसनीयता पर हमला बताते हुए कहा कि डिजिटल माध्यमों पर फैल रही गलत सूचनाएं गंभीर चिंता का विषय हैं। ऐसी पोस्टें समाज में भ्रम और वैमनस्य फैलाने का कार्य करती हैं।
मुख्य न्यायाधीश ने चेतावनी दी कि फर्जी खबरें फैलाने वालों के खिलाफ कानून के अनुसार कठोर कार्रवाई की जाएगी। साथ ही उन्होंने आम नागरिकों से अपील की कि वे किसी भी सूचना को बिना जांचे-परखे आगे साझा न करें।
उन्होंने यह भी कहा कि वर्तमान समय में सोशल मीडिया पर असत्य सूचनाओं का तेजी से प्रसार एक बड़ी चुनौती बन चुका है, जिससे निपटने के लिए जागरूकता और जिम्मेदारी दोनों आवश्यक हैं।
इस मामले ने एक बार फिर डिजिटल प्लेटफॉर्म्स पर फैल रही भ्रामक सूचनाओं और फर्जी खबरों की समस्या को उजागर कर दिया है, जिस पर न्यायपालिका लगातार चिंता व्यक्त करती रही है।












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