नई दिल्ली:भारत ने भूकंप प्रभावित नेपाल को रविवार को दवाएं तथा अन्य राहत सामग्री भेजी। पश्चिमी नेपाल में शुक्रवार को भीषण भूकंप आया था, जिसमें 150 से अधिक लोगों की मौत हुई और 160 से अधिक लोग घायल हो गए। भारत ने भारतीय वायुसेना के सैन्य परिवहन विमान से ये राहत समग्री भेजी है। विदेश मंत्री एस जयशंकर ने सोशल मीडिया मंच ‘एक्स’ पर लिखा, ”नेपाल के भूकंप प्रभावित इलाकों के लिए आपात राहत सहयोग मुहैया करा रहे हैं। पहले कदम उठाने वाले देश के तौर पर भारत दवाएं और राहत सामग्री भेज रहा है। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की ‘पड़ोसी पहले’ नीति पर काम कर रहे हैं।” राहत सामग्री की खेप नेपाल में भारतीय राजदूत नवीन श्रीवास्तव ने नेपाली अधिकारियों को सौंपी।
कई मकान क्षतिग्रस्त होने से हजारों लोग बाहर सोए
नेपाल में भूकंप के कारण कम से कम 157 लोगों की मौत होने और बड़ी संख्या में मकानों के क्षतिग्रस्त या नष्ट होने के कारण देश के पश्चिमोत्तर हिस्से के पर्वतीय गांवों में हजारों लोगों को कड़ाके की ठंड के बावजूद शनिवार रात को बाहर सड़कों पर सोना पड़ा। नेपाल में शुक्रवार रात अचानक आए भूकंप से जाजरकोट जिले के गांवों में अधिकतर मकान या तो ढह गए या गंभीर रूप से क्षतिग्रस्त हो गए, जबकि कस्बों में कंक्रीट के कुछ मकान क्षतिग्रस्त हो गए। चिउरी गांव के निवासी लाल बहादुर बीका ने भूकंप के कारण मारे गए 13 लोगों के सफेद कपड़ों में लिपटे शवों की ओर इशारा करते हुए कहा, ”हम अपने गांवों में मारे गए लोगों के शवों के अंतिम संस्कार का इंतजार कर रहे हैं और भूकंप में घायल हुए लोगों की देखभाल करने की कोशिश कर रहे हैं।” इन शवों का रविवार सुबह अंतिम संस्कार किया जाना है।
चिउरी गांव में कई मकान ढह गए हैं। लोगों ने रात में खुद को गर्म रखने के लिए प्लास्टिक की चादरों और पुराने कपड़ों का उपयोग किया। कई लोग अपने ढह चुके मकानों के मलबे के नीचे से अपना सामान निकालने में असमर्थ हैं। बचावकर्मी तत्काल सहायता पहुंचाने के लिए संघर्ष कर रहे हैं, लेकिन कई पहाड़ी गांवों तक पैदल ही पहुंचा जा सकता है जिसके कारण अभियान में बाधा पैदा हो रही है। भूकंप के कारण हुए भूस्खलन से सड़कें भी अवरुद्ध हो गई हैं। सैनिकों को अवरुद्ध सड़कों को साफ करने की कोशिश करते देखा जा सकता है। देश के उपप्रधानमंत्री नारायण काजी श्रेष्ठ ने शनिवार को कहा कि सरकार प्रभावित क्षेत्रों में सहायता पहुंचाने की कोशिश कर रही है। हजारों लोगों के रातों-रात बेघर हो जाने के कारण तंबू, भोजन और दवाइयां भेजी गई हैं।













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