डेस्क : भारत और ऑस्ट्रेलिया ने गुरुवार को साइबर सुरक्षा, अत्याधुनिक तकनीकों, डिजिटल लचीलापन और आपूर्ति शृंखला को मजबूत करने के लिए एक नई रणनीतिक पहल “भारत-ऑस्ट्रेलिया पार्टनरशिप ऑन साइबर, क्रिटिकल टेक्नोलॉजीज एंड सप्लाई चेन्स (PACTS)” की शुरुआत की। यह साझेदारी दोनों देशों के बीच 2020 में हुए साइबर और क्रिटिकल टेक्नोलॉजी सहयोग ढांचे की जगह लेगी और व्यापक रणनीतिक साझेदारी को और मजबूती प्रदान करेगी।
दोनों देशों ने कहा कि वर्तमान दौर में साइबर सुरक्षा, महत्वपूर्ण तकनीक और मजबूत आपूर्ति शृंखला आर्थिक विकास के साथ-साथ राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए भी अहम हैं। नई साझेदारी का उद्देश्य हिंद-प्रशांत क्षेत्र में डिजिटल सुरक्षा बढ़ाना, भरोसेमंद तकनीकी विकल्प उपलब्ध कराना और वैश्विक साइबर लचीलापन मजबूत करना है।
घोषणा पत्र में कहा गया कि इस साझेदारी के तहत सुरक्षा, संरक्षा, लचीलापन, समावेशिता और लोकतांत्रिक मूल्यों को प्राथमिकता दी जाएगी। दोनों देश जिम्मेदार तकनीकी नेतृत्व को बढ़ावा देने के लिए मिलकर काम करेंगे।
पांच प्रमुख क्षेत्रों में होगा सहयोग
PACTS को पांच प्रमुख स्तंभों में विभाजित किया गया है। इनमें आपूर्ति शृंखला की मजबूती और विविधीकरण, महत्वपूर्ण तकनीक, साइबर सुरक्षा, डिजिटल लचीलापन और रक्षा अनुसंधान सहयोग शामिल हैं।
आपूर्ति शृंखला के क्षेत्र में दोनों देश भरोसेमंद वेंडर ढांचे को विकसित करेंगे। इसके अलावा सेमीकंडक्टर सप्लाई चेन, सुरक्षित अंडरसी केबल नेटवर्क और महत्वपूर्ण खनिजों की आपूर्ति को मजबूत करने पर भी काम किया जाएगा।
महत्वपूर्ण तकनीकों के तहत आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI), अंतरिक्ष तकनीक, दूरसंचार, जैव प्रौद्योगिकी और उन्नत सामग्री जैसे क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाया जाएगा। दोनों देश सुरक्षित और भरोसेमंद एआई मानकों को विकसित करने के लिए अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी प्रयास करेंगे।
साइबर सुरक्षा और डिजिटल क्षेत्र में बढ़ेगा सहयोग
साइबर सुरक्षा के क्षेत्र में भारत और ऑस्ट्रेलिया द्विपक्षीय तंत्र को मजबूत करेंगे। दोनों देश साइबर अपराधों से निपटने, डेटा गवर्नेंस, साइबर तकनीक में व्यापार और निवेश बढ़ाने तथा विशेषज्ञ कौशल विकास के लिए संयुक्त कार्यशालाएं आयोजित करेंगे। इसके तहत साइबर तकनीकी कौशल को बढ़ावा देने के लिए एक साइबर टेक स्किल इनक्यूबेटर हब स्थापित करने की योजना भी है।
डिजिटल लचीलापन के तहत भारत के डिजिटल पब्लिक इंफ्रास्ट्रक्चर (DPI) मॉडल के सिद्धांतों को हिंद-प्रशांत क्षेत्र में आगे बढ़ाने पर जोर दिया जाएगा। स्वच्छ ऊर्जा, स्वास्थ्य, शिक्षा और सामाजिक सुरक्षा जैसे क्षेत्रों में डिजिटल समाधान विकसित करने के लिए संयुक्त परियोजनाएं चलाई जाएंगी।
रक्षा अनुसंधान में भी बढ़ेगी साझेदारी
रक्षा क्षेत्र में भारत के रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन (DRDO) और ऑस्ट्रेलिया के डिफेंस साइंस एंड टेक्नोलॉजी ग्रुप के बीच सहयोग को और मजबूत किया जाएगा। दोनों देश समुद्री निगरानी, उन्नत रक्षा सामग्री और रक्षा तकनीक से जुड़े अनुसंधान पर मिलकर काम करेंगे। साथ ही रक्षा क्षेत्र के स्टार्टअप और नवाचार संस्थानों के बीच सहयोग बढ़ाने पर भी ध्यान दिया जाएगा।
इस साझेदारी की निगरानी दोनों देशों के वरिष्ठ अधिकारी करेंगे। ऑस्ट्रेलिया के प्रधानमंत्री एवं कैबिनेट विभाग के इंटरनेशनल एंड सिक्योरिटी ग्रुप के डिप्टी सेक्रेटरी और भारत के डिप्टी नेशनल सिक्योरिटी एडवाइजर इसके सह-अध्यक्ष होंगे। हर साल वरिष्ठ अधिकारियों की बैठक आयोजित कर साझेदारी की प्रगति की समीक्षा की जाएगी और नए सहयोग क्षेत्रों की पहचान की जाएगी।
भारत और ऑस्ट्रेलिया के बीच यह नई पहल हिंद-प्रशांत क्षेत्र में रणनीतिक सहयोग को और गहरा करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है।













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