नई दिल्ली : बाढ़, भूकंप, तूफान या आग जैसी प्राकृतिक आपदाओं की स्थिति में किराये के मकान में रहने वाले लोगों को अब अपने अधिकारों को लेकर जागरूक रहने की जरूरत है। कानून में ऐसी परिस्थितियों के लिए किरायेदारों और मकान मालिकों दोनों के अधिकार और जिम्मेदारियां तय की गई हैं।
प्राकृतिक आपदा के कारण यदि किराये की संपत्ति पूरी तरह या आंशिक रूप से नष्ट हो जाती है और उसमें रहना संभव नहीं रहता, तो किरायेदार को कई महत्वपूर्ण कानूनी अधिकार मिलते हैं। ट्रांसफर ऑफ प्रॉपर्टी एक्ट, 1882 और मॉडल टेनेंसी एक्ट, 2021 ऐसे मामलों में किरायेदारों की सुरक्षा सुनिश्चित करते हैं।
मकान नष्ट होने पर किरायेदार खत्म कर सकता है लीज
ट्रांसफर ऑफ प्रॉपर्टी एक्ट की धारा 108(B)(e) के अनुसार, यदि किराये की संपत्ति आग, बाढ़, तूफान, हिंसा या अन्य प्राकृतिक कारणों से रहने योग्य नहीं रह जाती है, तो किरायेदार लीज को समाप्त करने का विकल्प चुन सकता है।
हालांकि, यह अधिकार तभी मिलेगा जब संपत्ति को हुआ नुकसान किरायेदार की गलती या लापरवाही के कारण न हुआ हो।
आपदा के साथ अपने आप खत्म नहीं होता किराया समझौता
कानून के अनुसार, प्राकृतिक आपदा आने मात्र से रेंट एग्रीमेंट अपने आप समाप्त नहीं हो जाता। किरायेदार को यह तय करना होता है कि वह लीज जारी रखना चाहता है या उसे खत्म करना चाहता है।
यदि किरायेदार उसी मकान में रहना जारी रखता है तो उसे किराया देना होगा। वहीं, मामूली नुकसान या सामान्य मरम्मत की स्थिति में किरायेदारी खत्म करने का अधिकार नहीं मिलता।
मकान मालिक मरम्मत तक नहीं मांग सकता किराया
मॉडल टेनेंसी एक्ट, 2021 की धारा 15(6) के तहत, यदि कोई मकान प्राकृतिक आपदा के कारण रहने योग्य नहीं रह जाता तो मकान मालिक तब तक किराया नहीं ले सकता, जब तक कि वह मकान की मरम्मत कराकर उसे दोबारा रहने योग्य न बना दे।
यह प्रावधान किरायेदारों को आपदा के समय आर्थिक दबाव से राहत देता है।
15 दिन में लौटाना होगा सिक्योरिटी डिपॉजिट
यदि मकान मालिक मरम्मत कराने में असमर्थ रहता है या संपत्ति लंबे समय तक रहने योग्य नहीं बन पाती, तो नोटिस अवधि समाप्त होने के 15 दिनों के भीतर किरायेदार का सिक्योरिटी डिपॉजिट और एडवांस किराया वापस करना होगा।
हालांकि, किरायेदार पर कोई बकाया राशि या कानूनी देनदारी होने पर उसे समायोजित किया जा सकता है।
फिक्स्ड टर्म एग्रीमेंट खत्म होने पर भी मिलेगी राहत
मॉडल टेनेंसी एक्ट के अनुसार, यदि प्राकृतिक आपदा के दौरान किरायेदारी का निश्चित अवधि वाला समझौता समाप्त हो जाता है, तो किरायेदार के अनुरोध पर मकान मालिक को आपदा समाप्त होने के बाद एक महीने तक उसी शर्तों पर रहने की अनुमति देनी होगी।
आपात स्थिति में बिना नोटिस प्रवेश कर सकता है मकान मालिक
सामान्य परिस्थितियों में मकान मालिक को मरम्मत के लिए किराये के मकान में प्रवेश से पहले 24 घंटे का नोटिस देना जरूरी होता है। लेकिन प्राकृतिक आपदा या आपात स्थिति में यह नियम लागू नहीं होता। सुरक्षा और जरूरी मरम्मत के लिए मकान मालिक बिना पूर्व सूचना के भी परिसर में प्रवेश कर सकता है।
कानून विशेषज्ञों के मुताबिक, प्राकृतिक आपदा के समय किरायेदारों को अपने अधिकारों की जानकारी होना जरूरी है, ताकि वे अनावश्यक आर्थिक नुकसान से बच सकें और सही कानूनी कदम उठा सकें।













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