नई दिल्ली : छात्रों के मानसिक स्वास्थ्य पर सुप्रीम कोर्ट द्वारा गठित नेशनल टास्क फोर्स (एनटीएफ) अपनी अंतिम रिपोर्ट में प्रतियोगी परीक्षाओं का दबाव, कोचिंग संस्कृति, पाठ्यक्रम में लगातार बदलाव और शिक्षा व्यवस्था में असमानताओं को छात्रों की मानसिक परेशानी के प्रमुख कारणों के रूप में चिह्नित कर सकता है। पैनल से जुड़े सूत्रों के अनुसार, हालिया नीट विवाद समेत प्रवेश परीक्षाओं से जुड़े तनाव को भी रिपोर्ट में शामिल किया गया है।
नेशनल टास्क फोर्स का नेतृत्व सुप्रीम कोर्ट के पूर्व न्यायाधीश एस. रविंद्र भट्ट कर रहे हैं। इस समिति का गठन मार्च 2025 में उच्च शिक्षा संस्थानों में बढ़ती छात्र आत्महत्या की घटनाओं की जांच और उनसे निपटने के उपाय सुझाने के उद्देश्य से किया गया था।
हालांकि समिति का मुख्य फोकस उच्च शिक्षा संस्थानों तक सीमित है, लेकिन पैनल ने माना है कि छात्रों पर मानसिक दबाव की शुरुआत कई बार स्कूली शिक्षा के स्तर से ही हो जाती है। अत्यधिक प्रतिस्पर्धी प्रवेश परीक्षा प्रणाली, अभिभावकों की अपेक्षाएं और कोचिंग आधारित तैयारी व्यवस्था छात्रों के तनाव को बढ़ाने वाले कारक बन रहे हैं।
टास्क फोर्स ने आठ जून को अपनी अंतरिम रिपोर्ट सुप्रीम कोर्ट में पेश की थी। रिपोर्ट में कहा गया है कि भारत में छात्र आत्महत्याओं को केवल मानसिक स्वास्थ्य समस्या के रूप में नहीं देखा जा सकता, बल्कि इसके पीछे कई सामाजिक और शैक्षणिक कारण भी जुड़े हुए हैं।
सूत्रों के मुताबिक, अंतिम रिपोर्ट अक्टूबर में पेश किए जाने की संभावना है। इसमें छात्र आत्महत्याओं को विभिन्न संरचनात्मक दबावों का परिणाम बताया जा सकता है। समिति ने यह भी अध्ययन किया है कि पाठ्यक्रम और शिक्षण पद्धतियों में बार-बार होने वाले बदलाव छात्रों में चिंता और असुरक्षा की भावना को कैसे बढ़ाते हैं।
नीट-यूजी परीक्षा में प्रश्न पत्र लीक के आरोपों के बाद पैदा हुए विवाद ने भी छात्रों के तनाव को बढ़ाया था। सुप्रीम कोर्ट ने सुनवाई के दौरान देश में छात्र आत्महत्या के बढ़ते मामलों पर चिंता जताई थी और कहा था कि पिछले एक दशक में ऐसे मामलों में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है। वर्ष 2022 में छात्र आत्महत्या के मामले करीब 13 हजार तक पहुंच गए थे।
टास्क फोर्स ने छात्र कल्याण से जुड़े मुद्दों पर देशव्यापी स्तर पर सुझाव जुटाए हैं। इसके लिए आयोजित परामर्श प्रक्रिया में करीब 60 हजार शिक्षकों और लगभग तीन लाख अभिभावकों ने भाग लिया। समिति की अंतिम रिपोर्ट में छात्रों के मानसिक स्वास्थ्य को बेहतर बनाने के लिए नीतिगत बदलावों और संस्थागत सुधारों की सिफारिशें शामिल होने की उम्मीद है।













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