हिंदू धर्म में हर माह की शुक्ल पक्ष और कृष्ण पक्ष की एकादशी तिथि को जगत के पालनहार श्रीहरि विष्णुजी की पूजा-आराधना का बड़ा महत्व है। हर साल वैशाख माह के कृष्ण पक्ष की एकादशी तिथि को वरुथिनी एकादशी मनाई जाती है। विष्णुजी से सुख-समृद्धि का आशीर्वाद पाने के लिए यह सबसे शुभ समय माना जाता है। हिंदू पंचांग के अनुसार, इस साल 4 मई को वरुथिनी एकादशी मनाई जाएगी। इस दिन धन से जुड़ी समस्याओं से म्किति पाने के लिए वरुथिनी एकादशी का व्रत और दान-पुण्य के कार्य बेहद शुभ माने गए हैं। आइए जानते हैं वरुथिनी एकादशी की सही डेट, शुभ मुहूर्त और इस दिन क्या करें-क्या नहीं?
कब है वरुथिनी एकादशी ?
हिंदू पंचांग के अनुसार, इस वर्ष वैशाख माह के कृष्ण पक्ष की एकादशी तिथि की शुरुआत 3 मई को रात 11 बजकर 24 मिनट पर हो रही है और जिसकी समाप्ति 4 मई को रात 8 बजकर 38 मिनट पर होगी। इसलिए उदयातिथि के अनुसार, 4 मई को वरुथिनी एकादशी का व्रत रखा जाएगा। इस साल वरुथिनी एकादशी पर त्रिपुष्कर योग, इंद्र योग और वैधृति योग का निर्माण हो रहा है। इसलिए इस दिन विष्णुजी की पूजा-आराधना का महत्व कहीं अधिक बढ़ जाएगा।
वरुथिनी एकादशी के दिन क्या करें-क्या नहीं?
वरुथिनी एकादशी के दिन तुलसी के पौध पर जल चढ़ाएं और पूजा करें।
वरुथिनी एकादशी के दिन राहगीरों को पानी पिलाएं।
पशु-पक्षियों के लिए पानी और दाने की व्यवस्था करें।
इस दिन अपनी क्षमतानुसार अन्न का भी दान करें।
वरुथिनी एकादशि के दिन वस्त्र दान करना भी शुभ होता है।
मान्यता है कि वरुथिनी एकादशी पर फल दान करने से 10 हजार साल तपस्या करने के सामान शुभ फल मिलता है।
वरुथिनी एकादशी पर पूजा के दौरान विष्णुजी को गेदें का फूल अर्पित करें।
वरुथिनी एकादशी के तामसिक भोजन का सेवन नहीं करना चाहिए।
इस व्रत में अन्न और जल ग्रहण नहीं किया जाता है। शाम को फलहारी ग्रहण कर सकते हैं।
एकादशी व्रत के अगले दिन द्वादशी समाप्त होने से पहले पारण करना शुभ माना गया है।
डिस्क्लेमर: इस आलेख में दी गई जानकारियों पर हम दावा नहीं करते कि ये पूर्णतया सत्य है और सटीक है। इन्हें अपनाने से पहले संबंधित क्षेत्र के विशेषज्ञ की सलाह जरूर लें।













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