खाद्य नियामक भारतीय खाद्य सुरक्षा और मानक प्राधिकरण यानी FSSAI ने पैकेट वाले खाद्य पदार्थों को लेकर एक अहम फैसला लिया है। नियामक पैकेट वाले खाद्य पदार्थों पर नमक, चीनी और सैचुरेटेड फैट के बारे में बोल्ड अक्षरों के साथ ही बड़े फॉन्ट में जानकारी देने को अनिवार्य करने की तैयारी कर रहा है। नियामक ने शनिवार को इस संबंध में लेबलिंग के नियमों में बदलाव को मंजूरी दी है। FSSAI इस बारे में एक ड्राफ्ट नोटिफिकेशन जारी करेगा और हितधारकों से टिप्पणियां मांगेगा।
फैसला लेने की वजह
नियामक ने कहा कि इस संशोधन का मकसद उपभोक्ताओं को उत्पाद के पोषण मूल्य को अच्छी तरह समझने और बेहतर निर्णय लेने में सक्षम बनाना है। बता दें कि पोषण संबंधी जानकारी लेबलिंग के संबंध में खाद्य सुरक्षा और मानक (लेबलिंग और प्रदर्शन) विनियम, 2020 में संशोधन को मंजूरी देने का फैसला FSSAI के चेयरमैन अपूर्व चंद्रा की अध्यक्षता में लिया गया।
क्या कहा स्वास्थ्य मंत्रालय ने
केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय के मुताबिक ग्राहकों को स्वस्थ विकल्प चुनने के लिए सशक्त बनाने के साथ-साथ, यह संशोधन गैर-संचारी रोगों (एनसीडी) के प्रसार से निपटने और सार्वजनिक स्वास्थ्य एवं कल्याण को बढ़ावा देने के प्रयासों में भी योगदान देगा। इसके अलावा स्पष्ट और स्पेशल लेबलिंग संबंधी जरूरतों के विकास को प्राथमिकता देने से एनसीडी से निपटने के वैश्विक प्रयास में मदद मिलेगी।
जूस को लेकर दावे पर भी सख्त
इससे पहले FSSAI ने खाद्य व्यवसाय से जुड़े परिचालकों से विज्ञापनों के साथ-साथ डिब्बाबंद उत्पादों पर लगे ‘लेबल’ में 100 प्रतिशत फलों के जूस के दावों को तुरंत हटाने को कहा था। खाद्य कारोबार से जुड़े सभी परिचालकों (एफबीओ) को एक सितंबर, 2024 से पहले से छपी पैकेजिंग सामग्रियों को समाप्त करने का भी निर्देश दिया गया है।
खाद्य नियामक के मुताबिक इस तरह के दावे भ्रामक हैं, खासकर उन स्थितियों में जहां फलों के रस का मुख्य घटक पानी है और प्राथमिक घटक यानी जिसके लिए दावा किया गया है, केवल सीमित सांद्रता में मौजूद है।













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