नई दिल्ली : अडानी समूह ने ऊर्जा क्षेत्र में एक बड़ा और रणनीतिक विस्तार करते हुए परमाणु ऊर्जा (न्यूक्लियर पावर) सेक्टर में प्रवेश की घोषणा की है। समूह ने वर्ष 2035 तक 10 गीगावॉट (GW) परमाणु ऊर्जा क्षमता विकसित करने का लक्ष्य तय किया है। यह घोषणा समूह की नई ऊर्जा रणनीति का हिस्सा मानी जा रही है।
समूह के अध्यक्ष गौतम अडानी ने कहा कि अडानी अटॉमिक एनर्जी के माध्यम से यह कदम भारत की दीर्घकालिक ऊर्जा सुरक्षा को मजबूत करने की दिशा में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा। कंपनी ने इस क्षेत्र में निवेश और परियोजना विकास की तैयारी शुरू कर दी है तथा भूमि चिन्हित किए जाने की भी जानकारी सामने आई है।
जानकारों के अनुसार, यह कदम अडानी समूह को देश के ऊर्जा क्षेत्र में एक एकीकृत (इंटीग्रेटेड) पावर प्लेटफॉर्म के रूप में स्थापित करने की रणनीति का हिस्सा है, जिसमें पारंपरिक ऊर्जा, नवीकरणीय ऊर्जा, गैस आधारित परियोजनाएं और अब परमाणु ऊर्जा शामिल हैं।
भारत में वर्तमान में परमाणु ऊर्जा उत्पादन लगभग 8 गीगावॉट के आसपास है, जिसे वर्ष 2047 तक 100 गीगावॉट तक ले जाने का लक्ष्य रखा गया है। इस क्षेत्र में अब निजी कंपनियों की भागीदारी बढ़ने से प्रतिस्पर्धा और निवेश दोनों के नए अवसर बनने की संभावना जताई जा रही है।
अडानी समूह का यह कदम न केवल ऊर्जा क्षेत्र में उसकी उपस्थिति को और व्यापक बनाता है, बल्कि देश की बढ़ती बिजली मांग और स्वच्छ ऊर्जा लक्ष्यों के संदर्भ में भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है।













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