नई दिल्ली : वैश्विक स्तर पर जेट ईंधन (एविएशन फ्यूल) की कीमतों में लगातार बढ़ोतरी और आपूर्ति को लेकर बनी अनिश्चितता के बीच हवाई किराए में 25 प्रतिशत तक वृद्धि की आशंका जताई जा रही है। विशेषज्ञों के अनुसार, ईंधन संकट का सीधा असर एयरलाइंस के परिचालन खर्च पर पड़ रहा है, जिससे आने वाले समय में यात्रियों को अधिक किराया चुकाना पड़ सकता है।
रिपोर्टों के मुताबिक, मध्य पूर्व में जारी भू-राजनीतिक तनाव और होर्मुज जलडमरूमध्य के माध्यम से तेल आपूर्ति पर बने दबाव ने वैश्विक ईंधन बाजार को प्रभावित किया है। इसी कारण जेट ईंधन की कीमतों में अस्थिरता देखी जा रही है, जिसका असर पूरी एविएशन इंडस्ट्री पर पड़ रहा है।
विश्लेषकों का कहना है कि ईंधन लागत एयरलाइंस के कुल खर्च का बड़ा हिस्सा होती है, ऐसे में इसकी कीमतों में बढ़ोतरी का बोझ सीधे यात्रियों तक पहुंचता है। कई अंतरराष्ट्रीय एयरलाइंस पहले ही बढ़ती लागत के कारण टिकट मूल्य निर्धारण की रणनीति पर पुनर्विचार कर रही हैं।
उद्योग विशेषज्ञों के अनुसार, यदि आपूर्ति संबंधी दबाव और कच्चे तेल की कीमतों में अस्थिरता जारी रहती है, तो आने वाले महीनों में हवाई यात्रा और महंगी हो सकती है। इसके साथ ही कुछ मार्गों पर उड़ानों की संख्या घटाने या किराए में अतिरिक्त ईंधन शुल्क जोड़ने की संभावना भी जताई जा रही है।
हालांकि, कुछ रिपोर्टों में यह भी संकेत दिया गया है कि ईंधन बाजार में स्थिरता आने पर स्थिति में सुधार संभव है, लेकिन फिलहाल एयरलाइंस और यात्री दोनों ही अनिश्चितता के माहौल में हैं।













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