डेस्क :अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने गुरुवार को व्हाइट हाउस में वेनेजुएला की प्रमुख विपक्षी नेता मारिया कोरिना मचाडो से मुलाकात की। इस मुलाकात को वेनेजुएला में लोकतंत्र की बहाली के लिए संघर्ष कर रहे लोगों के प्रति अमेरिका के समर्थन के रूप में देखा जा रहा है। बैठक के दौरान सबसे भावनात्मक क्षण तब आया, जब मचाडो ने राष्ट्रपति ट्रंप को अपना नोबेल शांति पुरस्कार पदक भेंट किया। यह सम्मान उन्हें वेनेजुएला में तानाशाही के खिलाफ लंबे समय से जारी संघर्ष के लिए मिला था। व्हाइट हाउस की प्रेस सचिव कैरोलिन लेविट ने मचाडो की सराहना करते हुए उन्हें वेनेजुएला की जनता की एक साहसी और प्रभावशाली आवाज बताया।
हालांकि, इस प्रतीकात्मक समर्थन के बावजूद ट्रंप प्रशासन के रणनीतिक आकलन में किसी बड़े बदलाव के संकेत नहीं मिले हैं। प्रेस सचिव लेविट ने स्पष्ट किया कि राष्ट्रपति ट्रंप का अब भी मानना है कि मौजूदा हालात में मचाडो के पास वेनेजुएला का नेतृत्व संभालने के लिए पर्याप्त राजनीतिक समर्थन नहीं है। उन्होंने कहा कि राष्ट्रपति का आकलन उनके सलाहकारों और राष्ट्रीय सुरक्षा टीम से मिली जानकारियों तथा जमीनी हकीकत पर आधारित है। लेविट ने यह भी साफ किया कि इस बैठक को मचाडो के राजनीतिक भविष्य को लेकर अमेरिकी नीति में किसी बड़े बदलाव के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए।
गौरतलब है कि डोनाल्ड ट्रंप लगातार खुद को अंतरराष्ट्रीय संघर्षों में शांति स्थापना का श्रेय देते रहे हैं। वह अब तक आठ युद्ध रुकवाने का दावा कर चुके हैं, जिनमें भारत-पाकिस्तान तनाव का उल्लेख भी शामिल है। इसके बदले ट्रंप कई बार नोबेल शांति पुरस्कार की मांग कर चुके हैं और इस दावे को पाकिस्तान जैसे कुछ देशों का समर्थन भी मिला है, हालांकि अब तक उन्हें यह सम्मान नहीं मिल सका है।
मचाडो और ट्रंप की यह मुलाकात ऐसे समय हुई है, जब वेनेजुएला गंभीर राजनीतिक और आर्थिक संकट से जूझ रहा है। विशेषज्ञों का मानना है कि ट्रंप प्रशासन का यह यथार्थवादी रुख दर्शाता है कि अमेरिका वेनेजुएला के विपक्ष के साहस और संघर्ष का सम्मान तो करता है, लेकिन वह ऐसे किसी नेतृत्व पर भरोसा करने से बच रहा है, जिसे वह राजनीतिक रूप से कमजोर मानता है।
इस बीच, नॉर्वियन नोबेल इंस्टिट्यूट ने स्पष्ट किया है कि मारिया कोरिना मचाडो को मिला नोबेल शांति पुरस्कार किसी अन्य व्यक्ति को सौंपा या उसके साथ साझा नहीं किया जा सकता। इंस्टिट्यूट ने यह बयान मचाडो के उस कथन के बाद जारी किया, जिसमें उन्होंने पुरस्कार को राष्ट्रपति ट्रंप को देने या उनके साथ साझा करने की इच्छा जताई थी। इंस्टिट्यूट ने अपने बयान में कहा कि एक बार नोबेल शांति पुरस्कार की घोषणा हो जाने के बाद उस फैसले को न तो बदला जा सकता है और न ही पुरस्कार किसी और को हस्तांतरित किया जा सकता है।













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