डेस्क : प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने पहली बार आधिकारिक तौर पर दावा किया है कि भगोड़े हीरा कारोबारी मेहुल चोकसी के बेटे रोहन चोकसी भी अपने पिता के साथ मनी लॉन्ड्रिंग में शामिल थे। यह दावा दिल्ली स्थित संपत्ति जब्ती अपील अधिकरण (ATFP) के समक्ष पेश किया गया है। मामला मुंबई की वॉकेश्वर रोड स्थित एक संपत्ति से जुड़ा है, जिसके अटैचमेंट को रोहन चोकसी ने चुनौती दी है।
ईडी ने अधिकरण को बताया कि मेहुल चोकसी ने वर्ष 2013 में यह संपत्ति जानबूझकर अपने बेटे के नाम ट्रांसफर की थी, ताकि भविष्य में धोखाधड़ी उजागर होने की स्थिति में संपत्ति को जब्ती से बचाया जा सके। एजेंसी के मुताबिक यह एक सोची-समझी रणनीति थी, क्योंकि संबंधित अपराध 2015 से 2017 के बीच अंजाम दिए गए। ईडी का कहना है कि उपलब्ध सबूतों से स्पष्ट होता है कि रोहन चोकसी ने अपने पिता के साथ मिलकर मनी लॉन्ड्रिंग की प्रक्रिया में सक्रिय भूमिका निभाई।
यह मामला बहुचर्चित पंजाब नेशनल बैंक (PNB) घोटाले से जुड़ा है, जिसमें मेहुल चोकसी पर भारतीय बैंकों से हजारों करोड़ रुपये की धोखाधड़ी का आरोप है। जांच के दौरान ईडी ने मेहुल चोकसी, उसकी कंपनियों और परिवार से जुड़ी करीब 2,565 करोड़ रुपये की संपत्तियां अटैच की हैं। इनमें मुंबई के दादर ईस्ट में रोहन मर्केंटाइल प्राइवेट लिमिटेड के नाम एक फ्लैट और वॉकेश्वर रोड पर रोहन चोकसी के नाम एक अन्य फ्लैट शामिल हैं।
ईडी ने बताया कि 2018 में पीएमएलए के तहत संबंधित प्राधिकरण ने दादर स्थित फ्लैट के अटैचमेंट की पुष्टि की थी, लेकिन वॉकेश्वर रोड की संपत्ति को उस आदेश में शामिल नहीं किया गया। हाल ही में 8 जनवरी को एटीएफपी ने इस मामले को दोबारा प्राधिकरण के पास भेजते हुए निर्देश दिया है कि त्रुटि को सुधारकर वॉकेश्वर संपत्ति को भी अटैचमेंट में शामिल किया जाए। एजेंसी का कहना है कि भले ही संपत्ति 1994 में परिवार ट्रस्ट के माध्यम से खरीदी गई हो, लेकिन यदि उसका मूल्य अपराध से जुड़ा है तो उसे अटैच किया जा सकता है।
संपत्ति को लेकर रोहन चोकसी की दलील
रोहन चोकसी ने प्राधिकरण के समक्ष दलील दी कि संबंधित संपत्ति वर्ष 1994 में एक पारिवारिक ट्रस्ट द्वारा खरीदी गई थी और 2013 में उनके पिता ने इसे उनके नाम ट्रांसफर किया। उनका कहना है कि कथित मुख्य अपराध इसके बाद हुआ, इसलिए संपत्ति का अटैचमेंट कानूनन गलत है। रोहन ने यह भी तर्क दिया कि उनका नाम न तो किसी एफआईआर में है और न ही किसी चार्जशीट में, और वे 1993 में बनाए गए परिवार ट्रस्ट के लाभार्थी हैं, जब पीएमएलए कानून अस्तित्व में ही नहीं था।
रोहन चोकसी की ओर से पेश हुए वरिष्ठ वकील विजय अग्रवाल ने कहा कि संपत्ति और कथित अपराध के बीच कोई सीधा संबंध नहीं है। उन्होंने आरोप लगाया कि ईडी का कदम व्यक्तिगत पूर्वाग्रह पर आधारित है और जांच एजेंसी अपने अधिकार क्षेत्र की सीमा का उल्लंघन कर रही है। साथ ही उन्होंने 180 दिनों की वैधानिक समय-सीमा समाप्त होने का भी हवाला दिया।












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