कोलकाता : पश्चिम बंगाल विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष (लोके नेता) की नियुक्ति को लेकर चल रहा विवाद और गहरा गया है। विधानसभा सचिवालय ने उस पत्र को अस्वीकार कर दिया है, जिसमें एक वरिष्ठ विधायक को नेता प्रतिपक्ष बनाए जाने की सिफारिश की गई थी।
सूत्रों के अनुसार, तृणमूल कांग्रेस की ओर से सोवन्देब चट्टोपाध्याय को नेता प्रतिपक्ष नामित किए जाने की प्रक्रिया के तहत विधानसभा सचिवालय को एक पत्र भेजा गया था। इस पत्र पर पार्टी के एक वरिष्ठ नेता के हस्ताक्षर थे।
विधानसभा सचिवालय ने पत्र की वैधता और प्रक्रिया पर सवाल उठाते हुए इसे स्वीकार करने से इनकार कर दिया। सचिवालय का कहना है कि नेता प्रतिपक्ष की नियुक्ति के लिए निर्धारित नियमों और प्रक्रियाओं का पालन आवश्यक है, जिसमें विधायकों के समर्थन से संबंधित औपचारिकताएँ भी शामिल हो सकती हैं।
इस निर्णय के बाद राजनीतिक हलकों में नई बहस शुरू हो गई है। तृणमूल कांग्रेस का कहना है कि उनके पास पर्याप्त संख्याबल है और नेता प्रतिपक्ष का पद उन्हें मिलना चाहिए, जबकि विधानसभा की ओर से कहा गया है कि प्रक्रिया पूर्ण किए बिना किसी नामांकन को मान्यता नहीं दी जा सकती।
मामला अब प्रशासनिक और प्रक्रियागत विवाद के रूप में देखा जा रहा है। फिलहाल विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष की स्थिति स्पष्ट नहीं है और इस पर अंतिम निर्णय का इंतजार किया जा रहा है।













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