डेस्क : अभिनेता मनोज बाजपेयी ने अपने बचपन के सपनों, पिता की इच्छाओं और अपनी आगामी फिल्म ‘गवर्नर’ को लेकर कई अहम बातें साझा की हैं। यह फिल्म 1990 के दशक में भारत के आर्थिक संकट की पृष्ठभूमि पर आधारित बताई जा रही है और 12 जून को सिनेमाघरों में रिलीज़ होगी। फिल्म का निर्देशन चिन्मय मांडलेकर ने किया है, जबकि इसमें अदाह शर्मा और नौशाद मोहम्मद कुंजू भी प्रमुख भूमिकाओं में हैं। इसका निर्माण विपुल अमृतलाल शाह ने किया है।
फिल्म के विषय पर बात करते हुए मनोज बाजपेयी ने कहा कि यह कहानी उस दौर से प्रेरित है जब देश भुगतान संतुलन संकट से जूझ रहा था, विदेशी मुद्रा भंडार लगभग समाप्त होने की स्थिति में था और आर्थिक हालात बेहद नाजुक थे। उन्होंने बताया कि उस समय रिज़र्व बैंक के गवर्नर के रूप में एस. वेंकटरमणन की नियुक्ति अचानक हुई थी, जो तय परंपरागत प्रक्रिया से अलग थी।
मनोज बाजपेयी ने कहा कि उस दौर में प्रधानमंत्री राजीव गांधी की अनुशंसा पर और चंद्रशेखर सरकार के समय कई महत्वपूर्ण आर्थिक निर्णय लिए गए। उन्होंने यह भी उल्लेख किया कि उस समय मनमोहन सिंह भी आर्थिक नीति निर्माण में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे थे। अभिनेता के अनुसार, यह पूरी रणनीति पारंपरिक सोच से हटकर थी और इसमें बड़ा जोखिम शामिल था, लेकिन देश की अर्थव्यवस्था को संभालने के लिए यह आवश्यक साबित हुई।
अभिनेता ने कहा कि फिल्म उन “अनसुने नायकों” की कहानी सामने लाती है, जो पर्दे के पीछे रहकर देश के लिए महत्वपूर्ण निर्णय लेते हैं। उनके अनुसार, ऐसे लोगों के योगदान पर अक्सर चर्चा नहीं होती, जबकि देश की दिशा तय करने में उनकी भूमिका बेहद अहम होती है।
अपने किरदार की तैयारी को लेकर मनोज बाजपेयी ने बताया कि यह एक शांत और कम बोलने वाले नौकरशाह की भूमिका है, जिसका पूरा ध्यान आंकड़ों और नीतियों पर केंद्रित रहता है। उन्होंने कहा कि पहले के समय में शोध के लिए पुस्तकालयों पर निर्भर रहना पड़ता था, जबकि अब तकनीक और कृत्रिम बुद्धिमत्ता जैसे साधनों से जानकारी आसानी से उपलब्ध हो जाती है।
फिल्म के निर्माता विपुल अमृतलाल शाह की सराहना करते हुए उन्होंने कहा कि उनकी टीम हर आवश्यक संसाधन उपलब्ध कराती है, जिससे रचनात्मक काम बेहतर तरीके से हो पाता है। उन्होंने यह भी कहा कि उन्हें यह पटकथा इसलिए पसंद आई क्योंकि यह आर्थिक संकट जैसे जटिल विषय को मनोरंजक और सरल शैली में प्रस्तुत करती है।
मनोज बाजपेयी ने कहा कि यह फिल्म न केवल जानकारी देती है, बल्कि दर्शकों की समझ भी बढ़ाती है। उन्होंने उम्मीद जताई कि इसे अधिकारी वर्ग, न्यायपालिका, राजनीतिक क्षेत्र और आम दर्शक सभी देखेंगे, ताकि उन लोगों के योगदान को समझा जा सके जो पर्दे के पीछे रहकर देश को सही दिशा देने में काम करते हैं।
अपने बचपन को याद करते हुए अभिनेता ने बताया कि उन्हें नौ वर्ष की उम्र से ही अभिनय का सपना था, लेकिन उस समय सामाजिक माहौल ऐसा था कि लोग इस पेशे को लेकर सकारात्मक दृष्टि नहीं रखते थे। बिहार के उस दौर को याद करते हुए उन्होंने कहा कि अभिनय की इच्छा जताने पर लोग उसे गलत नजर से देखते थे।
उन्होंने यह भी बताया कि उनके पिता चाहते थे कि वे डॉक्टर बनें, क्योंकि वे स्वयं यह सपना पूरा नहीं कर पाए थे। परिवार की अपेक्षाओं और भावनात्मक जुड़ाव के कारण उन्होंने कभी अपने अभिनय के सपने को खुलकर सामने नहीं रखा, हालांकि उनका मन हमेशा इसी दिशा में लगा रहा।













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