डेस्क : संयुक्त राष्ट्र ने भारतीय सेना की अधिकारी मेजर अभिलाषा बराक को 2025 के संयुक्त राष्ट्र ‘सैन्य जेंडर एडवोकेट ऑफ द ईयर’ पुरस्कार के लिए चयनित किए जाने पर सराहना व्यक्त की है। यह सम्मान अंतरराष्ट्रीय शांति सैनिक दिवस के अवसर पर दिया जा रहा है।
यह पुरस्कार हर वर्ष 29 मई को संयुक्त राष्ट्र शांति सैनिक दिवस के अवसर पर उन शांति सैनिकों को दिया जाता है, जिन्होंने अपने मिशन के दौरान लैंगिक समानता को बढ़ावा देने और सामुदायिक सहभागिता में उल्लेखनीय योगदान दिया हो।
मेजर अभिलाषा बराक वर्तमान में लेबनान में संयुक्त राष्ट्र अंतरिम बल (यूएनआईएफआईएल) के साथ तैनात हैं, जहां वे ‘फीमेल एंगेजमेंट टीम’ का नेतृत्व कर रही हैं। उनके कार्यों में स्थानीय समुदायों, विशेषकर महिलाओं के साथ संवाद स्थापित करना और शांति मिशन में लैंगिक दृष्टिकोण को मजबूत करना शामिल है।
संयुक्त राष्ट्र शांति संचालन विभाग के सैन्य मामलों के कार्यालय द्वारा 2016 में स्थापित यह पुरस्कार हर वर्ष उस सैन्य शांति सैनिक को दिया जाता है, जिसने संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद के प्रस्ताव 1325 (महिला, शांति और सुरक्षा) के उद्देश्यों को आगे बढ़ाने में उत्कृष्ट भूमिका निभाई हो।
संयुक्त राष्ट्र के अनुसार, मेजर बराक के सामुदायिक संपर्क कार्यक्रमों और स्थानीय महिलाओं के साथ जुड़ाव को उनकी चयन प्रक्रिया में महत्वपूर्ण आधार माना गया।
वे यह सम्मान पाने वाली तीसरी भारतीय सैन्य अधिकारी हैं। उनसे पहले मेजर सुमन गावानी (2019) और मेजर राधिका सेन (2023) को यह सम्मान मिल चुका है।
भारत संयुक्त राष्ट्र शांति मिशनों में सबसे बड़े सैनिक योगदान देने वाले देशों में शामिल है और इसके जवान विभिन्न संघर्ष और संघर्षोत्तर क्षेत्रों में अपनी सेवाएं दे रहे हैं।













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