डेस्क:अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (IMF) की प्रमुख क्रिस्टालिना जॉर्जीवा ने भारत को वैश्विक अर्थव्यवस्था के लिए एक ‘प्रमुख विकास इंजन’ करार दिया है। उन्होंने कहा कि जहां चीन की विकास दर में सुस्ती देखने को मिल रही है, वहीं भारत तेजी से आगे बढ़ रहा है और विश्व अर्थव्यवस्था को नई दिशा दे रहा है।
यह बयान अगले सप्ताह वाशिंगटन में होने वाली आईएमएफ और विश्व बैंक की वार्षिक बैठक से पहले आया है। जॉर्जीवा ने कहा कि वर्तमान समय में वैश्विक आर्थिक वृद्धि के पैटर्न में स्पष्ट बदलाव दिख रहा है, जिसमें भारत की भूमिका केंद्रीय है।
🌏 वैश्विक आर्थिक परिदृश्य
- चीन की गति धीमी: चीन की आर्थिक विकास दर में लगातार गिरावट दर्ज की जा रही है।
- विश्वव्यापी वृद्धि: अनुमान के मुताबिक, इस वर्ष वैश्विक विकास दर 3% के आसपास रहने की संभावना है — जो पहले की चिंताओं से बेहतर है।
🇮🇳 भारत के मजबूत प्रदर्शन के चार प्रमुख कारण
आईएमएफ प्रमुख के अनुसार, विश्व अर्थव्यवस्था के लचीलेपन और भारत की मजबूती के पीछे चार मुख्य कारण हैं—
- मजबूत नीतिगत आधार: कई देशों, विशेषकर भारत ने, सुदृढ़ मौद्रिक और वित्तीय नीतियों का पालन किया है।
- निजी क्षेत्र का लचीलापन: भारतीय कंपनियां बदलती वैश्विक परिस्थितियों के अनुरूप तेजी से खुद को ढाल रही हैं।
- टैरिफ का सीमित प्रभाव: अमेरिका के आयात शुल्कों का असर शुरुआती आशंकाओं जितना गंभीर नहीं रहा है।
- अनुकूल वित्तीय वातावरण: वैश्विक वित्तीय बाजार अभी भी स्थिर और सहयोगी बने हुए हैं।
⚖️ ‘ट्रेड वॉर’ से बचाव और नई आर्थिक हकीकत
जॉर्जीवा ने कहा कि अमेरिका की टैरिफ नीतियों के बावजूद दुनिया अब तक “जैसे को तैसा” वाले ट्रेड वॉर से बची हुई है। हालांकि उन्होंने यह भी चेतावनी दी कि वैश्विक अर्थव्यवस्था का असली लचीलापन अभी परखा नहीं गया है और “अनिश्चितता अब नई सामान्य स्थिति” बनती जा रही है।
📈 भारत की तेज रफ्तार
भारत की मजबूती का अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि विश्व बैंक ने वित्त वर्ष 2025-26 के लिए भारत की विकास दर का अनुमान बढ़ाकर 6.5% कर दिया है।
इससे पहले, अप्रैल-जून तिमाही में भारत की जीडीपी ग्रोथ रेट 7.8% रही, जो पिछले पांच तिमाहियों में सबसे अधिक थी।
वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने भी हाल में कहा कि भारतीय अर्थव्यवस्था मजबूत घरेलू खपत और निवेश के बल पर आगे बढ़ रही है और बाहरी झटकों का देश के विकास पथ पर “सीमित प्रभाव” पड़ेगा।
निष्कर्ष:
विश्व अर्थव्यवस्था के नए दौर में भारत एक सशक्त और स्थिर वृद्धि केंद्र के रूप में उभर रहा है—जहां नीति, निजी क्षेत्र और वित्तीय अनुशासन मिलकर ‘नए वैश्विक विकास इंजन’ की रूपरेखा गढ़ रहे हैं।













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