नई दिल्ली : वैश्विक मंच पर भारत की बढ़ती भूमिका को लेकर एक बार फिर अंतरराष्ट्रीय समर्थन सामने आया है। फिनलैंड के राष्ट्रपति अलेक्जेंडर स्टब ने स्पष्ट शब्दों में कहा है कि भारत को संयुक्त राष्ट्र की सबसे प्रभावशाली संस्था संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में स्थायी सदस्यता मिलनी ही चाहिए। उनका कहना है कि आज की बदलती वैश्विक परिस्थितियों में सुरक्षा परिषद की मौजूदा संरचना वास्तविकताओं का प्रतिनिधित्व नहीं करती और इसमें सुधार समय की सबसे बड़ी आवश्यकता बन चुका है।
नई दिल्ली में आयोजित प्रतिष्ठित अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन रायसीना डायलॉग में भाग लेते हुए स्टब ने कहा कि भारत आज विश्व राजनीति, वैश्विक अर्थव्यवस्था और कूटनीति के केंद्र में खड़ा है। ऐसे में यह स्वाभाविक है कि दुनिया की सबसे महत्वपूर्ण निर्णय लेने वाली संस्था में भारत की स्थायी और प्रभावशाली भागीदारी होनी चाहिए।
उन्होंने कहा कि वर्तमान वैश्विक व्यवस्था तेजी से बदल रही है और अब केवल कुछ चुनिंदा देशों के हाथों में शक्ति केंद्रित रहने का दौर समाप्त हो रहा है। विश्व समुदाय को ऐसी संस्थाओं की जरूरत है जो आज की भू-राजनीतिक वास्तविकताओं को प्रतिबिंबित करें। स्टब के अनुसार, भारत की जनसंख्या, आर्थिक शक्ति, लोकतांत्रिक परंपरा और अंतरराष्ट्रीय मामलों में उसकी सक्रिय भूमिका उसे सुरक्षा परिषद की स्थायी सदस्यता का स्वाभाविक दावेदार बनाती है।
फिनलैंड के राष्ट्रपति ने भारत की स्वतंत्र और संतुलित विदेश नीति की भी प्रशंसा की। उन्होंने कहा कि भारत ने कई जटिल वैश्विक मुद्दों पर अपनी रणनीतिक स्वायत्तता बनाए रखते हुए एक परिपक्व और जिम्मेदार शक्ति के रूप में दुनिया को दिशा देने का काम किया है।
स्टब ने यह भी कहा कि आने वाले समय में तथाकथित ‘वैश्विक दक्षिण’ विश्व व्यवस्था को आकार देने में बड़ी भूमिका निभाएगा और इसमें भारत अग्रणी शक्ति के रूप में उभरेगा। इसलिए संयुक्त राष्ट्र प्रणाली में सुधार करते समय भारत को स्थायी सीट देना न केवल उचित बल्कि अनिवार्य कदम होगा।













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