डेस्क:रूस के सबसे बड़े बैंक स्बेरबैंक ने भारत से औद्योगिक आयात बढ़ाने और श्रमिकों की आवाजाही तेज करने की तैयारी शुरू कर दी है। बैंक के फर्स्ट डिप्टी सीईओ अलेक्ज़ेंडर वेद्याखिन ने यह जानकारी रॉयटर्स को दी। यह बयान ऐसे समय आया है जब राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन चार साल बाद भारत दौरे पर आ रहे हैं और अमेरिका लगातार भारत पर रूसी ऊर्जा खरीद घटाने का दबाव बना रहा है।
पुतिन के साथ रूस की बड़ी कंपनियों के शीर्ष अधिकारी भी नई दिल्ली पहुंचेंगे, जिनमें स्बेरबैंक से जुड़े दिग्गज भी शामिल हैं।
भारत-रूस व्यापार में नए अवसर
वेद्याखिन के अनुसार बैंक अब अपने रूसी ग्राहकों को सिर्फ भारत को निर्यात ही नहीं, बल्कि भारत से आयात बढ़ाने के लिए भी सक्रिय रूप से प्रोत्साहित कर रहा है। उन्होंने बताया कि स्बेरबैंक इस समय 6,000 से अधिक भारतीय कंपनियों के साथ काम कर रहा है, जिनका रूस के साथ पहले कोई व्यापारिक अनुभव नहीं था।
भारत-रूस व्यापार का मौजूदा आकार लगभग 70 अरब डॉलर है, लेकिन यह संतुलित नहीं माना जाता—भारत रूस से ऊर्जा की भारी खरीद करता है, जबकि आयात अपेक्षाकृत कम है। यही असंतुलन राष्ट्रीय मुद्राओं में लेनदेन बढ़ाने की कोशिशों में बाधा बनता है।
शीत युद्ध के दौर में भारत चाय, कपड़े और अन्य उपभोक्ता वस्तुएँ सोवियत संघ को निर्यात करता था। अब स्बेरबैंक रूसी कंपनियों को यह समझा रहा है कि भारत के मशीन निर्माण, फार्मा और आईटी सेक्टर मजबूत हैं और ऊर्जा बिक्री से मिलने वाले रुपये का उपयोग कर इन उत्पादों का बड़ा आयात किया जा सकता है।
राष्ट्रीय मुद्राओं में भुगतान
वेद्याखिन ने बताया कि रूस से भारतीय कंपनियों को होने वाले ज्यादातर भुगतान सीधे राष्ट्रीय मुद्राओं—रूबल और रुपये—में हो रहे हैं, जिससे प्रतिबंधों का जोखिम कम हो जाता है। रूस और भारत द्विपक्षीय व्यापार को 100 अरब डॉलर तक ले जाने का लक्ष्य रखते हैं। इसी दिशा में रूस के केंद्रीय बैंक ने हाल ही में मुंबई में अपना एक कार्यालय भी खोला है।
स्बेरबैंक ने भारतीय वस्तुओं के लिए डिफर्ड पेमेंट मैकेनिज्म के जरिए लेनदेन की गति भी तेज की है। बैंक के न्यू दिल्ली और मुंबई में कार्यालय हैं और बेंगलुरु में एक बड़ा आईटी हब संचालित होता है।
वेद्याखिन के अनुसार, अमेरिका के दबाव का बैंक के कारोबार पर कोई असर नहीं पड़ा है। 2025 में उसकी भारतीय शाखा में रुपये वाले खातों की संख्या 3.5 गुना बढ़ गई है।
रूस में भारतीय श्रमिकों की बढ़ती मांग
रूस में बेरोजगारी रिकॉर्ड-निम्न स्तर पर है और 2030 तक 30 लाख श्रमिकों की कमी का अनुमान है। वेद्याखिन ने बताया कि भारत के कुशल श्रमिकों की मांग लगातार बढ़ रही है और स्बेरबैंक कंपनियों को भारत से श्रमबल लाने में मदद कर रहा है।
उन्होंने कहा, “यह एक कुशल वर्कफोर्स है और हमारे सहयोग का एक महत्वपूर्ण क्षेत्र बन चुका है। हम रूसी कंपनियों को भारत से श्रम उपलब्ध कराने में सहायता कर रहे हैं।”













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