जयपुर : श्याम नगर स्थित भिक्षु साधना केन्द्र में जैन श्वेताम्बर तेरापंथ धर्मसंघ के नवें आचार्य श्री तुलसी जी का 30वां महाप्रयाण दिवस श्रद्धा, तप और समर्पण के भाव के साथ मनाया गया। इस अवसर पर पूरे परिसर में आध्यात्मिक वातावरण व्याप्त रहा और श्रद्धालुजनों ने सामूहिक रूप से गुरु स्मरण कर श्रद्धा-सुमन अर्पित किए।
कार्यक्रम का आयोजन जैन श्वेताम्बर तेरापंथी सभा, जयपुर द्वारा मुनिश्री तत्त्व रुचि जी “तरुण” और मुनिश्री संभव कुमार जी के सान्निध्य में किया गया। इसमें तेरापंथ महिला मंडल, तेरापंथ युवक परिषद, अणुव्रत समिति, भिक्षु साधना केन्द्र समिति सहित अनेक धार्मिक-सामाजिक संस्थाओं के पदाधिकारी एवं बड़ी संख्या में श्रावक-श्राविकाएं उपस्थित रहे।
कार्यक्रम में मुनिश्री तत्त्व रुचि जी “तरुण” ने आचार्य श्री तुलसी के जीवन और कार्यों का स्मरण करते हुए कहा कि वे दीन-दुखियों और दलितों के सच्चे मसीहा थे। उन्होंने कहा कि आचार्य श्री तुलसी ने अहिंसा, करुणा और मानवता के आदर्शों को जीवन में उतारा तथा समाज के वंचित वर्गों के उत्थान के लिए निरंतर प्रयास किए। उन्होंने आदिवासी, जनजाति एवं अनुसूचित समाज के उत्थान तथा अस्पृश्यता निवारण के लिए महत्वपूर्ण योगदान दिया।
मुनिश्री ने आगे कहा कि आचार्य श्री तुलसी ने नैतिक मूल्यों की स्थापना के लिए अणुव्रत आंदोलन का प्रवर्तन किया, जिसने समाज में संयम, सदाचार और अनुशासन की चेतना जागृत की। इसके साथ ही उन्होंने ‘नया मोड़’ अभियान के माध्यम से नारी शिक्षा, सामाजिक जागरूकता और कुरीतियों के विरुद्ध सशक्त संदेश दिया।
मुनिश्री संभव कुमार जी ने काव्यमय शैली में आचार्य श्री तुलसी के व्यक्तित्व और कृतित्व का वर्णन करते हुए कहा कि उन्होंने समाज में नैतिक क्रांति के लिए अणुव्रत आंदोलन प्रारंभ किया। साथ ही मानसिक शांति हेतु प्रेक्षाध्यान और व्यक्तित्व निर्माण के लिए जीवन विज्ञान जैसे अभिनव उपक्रमों का मार्ग प्रशस्त किया।
उन्होंने कहा कि आचार्य श्री तुलसी का जीवन निरभिमानता और निष्काम साधना का अद्वितीय उदाहरण है। उन्होंने जैन धर्म को जन-जन तक पहुंचाने और उसे व्यवहारिक जीवन मूल्यों से जोड़ने में ऐतिहासिक भूमिका निभाई।
कार्यक्रम का प्रारंभ नमस्कार महामंत्र के उच्चारण से हुआ। इस अवसर पर तेरापंथ महिला मंडल (सी-स्कीम व शहर) द्वारा तुलसी अष्टकम् का सुमधुर संगान किया गया, जिससे वातावरण भक्तिमय हो उठा।
इसके पश्चात विभिन्न संस्थाओं के पदाधिकारियों ने अपने विचार एवं श्रद्धा भाव व्यक्त करते हुए आचार्य श्री तुलसी को श्रद्धांजलि अर्पित की। अंत में सामूहिक जप अनुष्ठान के साथ तप-प्रत्याख्यान एवं संघगान का आयोजन हुआ, जिसके साथ कार्यक्रम का विधिवत समापन किया गया।













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