डेस्क: भरोसे के दुरुपयोग, निजी पलों के वीडियो बनाकर धमकाने और यौन उत्पीड़न की एक अत्यंत पीड़ादायक घटना कर्नाटक के बेंगलुरु के पास से सामने आई है। इस मामले में एक कॉलेज छात्रा को मानसिक दबाव और भय के माहौल में लंबे समय तक प्रताड़ित किए जाने का आरोप है। अपनी सामाजिक प्रतिष्ठा और निजता की रक्षा की कोशिश में वह लगातार शोषण का शिकार होती रही। अंततः इस गंभीर अपराध की जानकारी कर्नाटक पुलिस तक पहुँची।
पुलिस ने गुरुवार को 25 वर्षीय एक युवक सहित दो अन्य आरोपियों को गिरफ्तार किया है। तीनों पर बेंगलुरु दक्षिण जिले के मगदी क्षेत्र में छात्रा को धमकाने और सामूहिक दुष्कर्म करने के आरोप हैं। आरोपियों की पहचान 25 वर्षीय विकास, 19 वर्षीय प्रशांत और 28 वर्षीय चेतन के रूप में की गई है। पीड़िता एक कॉलेज छात्रा है। पुलिस के अनुसार, यह घटनाक्रम सितंबर से अक्टूबर के बीच का बताया जा रहा है।
तीनों आरोपियों को न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया है और वे वर्तमान में रामनगर जिला जेल में हैं। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, विकास और प्रशांत पीड़िता के साथ अन्य कॉलेजों में पढ़ते थे और मगदी क्षेत्र तक नियमित रूप से यात्रा करते थे।
घटना की पृष्ठभूमि
पुलिस के अनुसार, विकास की पीड़िता से सोशल मीडिया के माध्यम से जान-पहचान हुई थी। करीब छह महीने पहले दोनों के बीच बातचीत शुरू हुई। आरोप है कि इसी दौरान वह छात्रा को एक खाली घर में ले गया, जहाँ उसकी जानकारी के बिना निजी पलों का वीडियो बना लिया गया। बाद में यह वीडियो अन्य आरोपियों के साथ साझा किया गया और इसी के आधार पर छात्रा को डराया-धमकाया गया।
आरोप है कि वीडियो के ज़रिये ब्लैकमेल कर छात्रा पर बार-बार शारीरिक संबंध बनाने का दबाव डाला गया। अक्टूबर में उसे दोबारा बुलाया गया, जहाँ तीनों ने उसके साथ दुष्कर्म किया। जब छात्रा ने आगे संपर्क से इनकार किया, तो कथित तौर पर वीडियो सार्वजनिक करने की धमकी दी गई।
पुलिस तक पहुँचा मामला
लगातार मानसिक प्रताड़ना से टूटकर पीड़िता ने अंततः अपने परिवार को पूरी बात बताई और फिर पुलिस में शिकायत दर्ज कराई। पुलिस ने त्वरित कार्रवाई करते हुए आरोपियों को गिरफ्तार किया। उनके मोबाइल फोन ज़ब्त कर लिए गए हैं और फॉरेंसिक जांच जारी है।
पुलिस ने आरोपियों के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता (BNS) की संबंधित धाराओं में मामला दर्ज किया है और आगे की कानूनी प्रक्रिया जारी है।
नोट: पीड़िता की पहचान गोपनीय रखना कानूनन आवश्यक है और मीडिया व समाज की भी यह जिम्मेदारी है कि ऐसे मामलों में संवेदनशीलता और मर्यादा बनाए रखी जाए।













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