डेस्क : भारतीय रुपये में सोमवार को भारी दबाव देखने को मिला और यह अमेरिकी डॉलर के मुकाबले लगातार कमजोर होता चला गया। घरेलू विदेशी मुद्रा बाजार में रुपया लगभग 100 के स्तर के करीब पहुंच गया है, जिससे निवेशकों और आयात-निर्यात कारोबारियों में चिंता बढ़ गई है।
कारोबार की शुरुआत में ही रुपया 20 पैसे टूटकर 96.17 प्रति डॉलर के नए सर्वकालिक निचले स्तर पर खुला। इसके साथ ही यह 2026 में अब तक एशिया की सबसे कमजोर प्रदर्शन करने वाली प्रमुख मुद्रा बन गया है। विशेषज्ञों के अनुसार यह गिरावट लगातार वैश्विक आर्थिक दबावों और कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों के कारण देखने को मिल रही है।
इसी बीच इंडोनेशियाई रुपिया भी दबाव में आ गया और अपने अब तक के सबसे निचले स्तर 17,630 प्रति डॉलर तक गिर गया। दोनों एशियाई मुद्राओं में आई इस कमजोरी ने उभरते बाजारों में अस्थिरता को और बढ़ा दिया है।
बाजार विश्लेषकों का कहना है कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर डॉलर की मजबूती, भू-राजनीतिक तनाव और कच्चे तेल की ऊंची कीमतें भारत जैसे आयात-निर्भर देशों की मुद्राओं पर लगातार दबाव बना रही हैं। भारत के विदेशी मुद्रा भंडार और निवेश प्रवाह पर भी इसका असर देखा जा रहा है।
वित्तीय विशेषज्ञों का मानना है कि यदि वैश्विक परिस्थितियों में सुधार नहीं होता है, तो रुपये पर दबाव आगे भी बना रह सकता है। ऐसे में रिज़र्व बैंक की नीतिगत निगरानी और बाजार हस्तक्षेप की भूमिका महत्वपूर्ण बनी रहेगी।













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