जयपुर, 18 मई। अजमेर रोड स्थित टैगोर नगर के नवोदित अणुव्रत भवन में सोमवार को आयोजित धर्मसभा में मुनि श्री तत्त्व रुचि जी “तरुण” ने भगवान महावीर के अनेकान्तवाद को वर्तमान वैश्विक परिस्थितियों में अत्यंत प्रासंगिक और समाधानकारी बताया।
अपने प्रवचन में मुनि श्री ने कहा कि किसी भी समस्या के समाधान के लिए उसके प्रत्येक पक्ष को सापेक्ष दृष्टि से देखना और परखना आवश्यक है। सत्य कभी निरपेक्ष नहीं होता, इसलिए केवल कानों से सुनी या आँखों से देखी बात भी पूर्ण सत्य नहीं मानी जा सकती। उन्होंने कहा कि एकान्तवाद विवाद और टकराव को जन्म देता है, जबकि अनेकान्तवाद समन्वय और समाधान का मार्ग प्रशस्त करता है।
मुनि श्री ने उदाहरण देते हुए समझाया कि एक ही व्यक्ति किसी का पिता, किसी का पुत्र, किसी का पति, भाई अथवा जमाता हो सकता है। वस्तु या व्यक्ति को अनेक दृष्टिकोणों से देखना ही अनेकान्तवाद है। उन्होंने कहा कि सत्य की गहराई में उतरने के लिए ‘ही’ नहीं बल्कि ‘भी’ का प्रयोग आवश्यक है।
इस अवसर पर मुनि श्री संभव कुमार जी ने कहा कि अनेकान्त दृष्टि ही सुखमय सृष्टि का आधार है। आग्रह और हठ विग्रह का कारण बनते हैं, जबकि अनेकान्त दृष्टि व्यक्ति को आग्रह मुक्त कर व्यापक चिंतन की दिशा प्रदान करती है। उन्होंने कहा कि आज परिवार, समाज, राष्ट्र और विश्व में शांति एवं अहिंसा स्थापित करने के लिए अनेकान्त दृष्टिकोण की आवश्यकता है।
कार्यक्रम की शुरुआत तीर्थंकर अजीत प्रभु की स्तुति से हुई। इसके पश्चात उच्च रक्तचाप को संतुलित करने हेतु कायोत्सर्ग योग एवं शिथिलीकरण का प्रयोग कराया गया। इस दौरान ‘विसर्जन’ विषय पर प्रेरक एवं रोचक गेय व्याख्यान भी प्रस्तुत किया गया। अंत में मंगल पाठ एवं आभार ज्ञापन के साथ कार्यक्रम का समापन हुआ।













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