डेस्क : बी.वी. नागरत्ना ने न्यायाधीशों को अपने निर्णयों पर दृढ़ रहने की सलाह देते हुए कहा है कि किसी भी प्रकार के दबाव के कारण सही फैसला लेने से पीछे नहीं हटना चाहिए। उन्होंने कहा कि न्यायाधीशों को राजनीतिक दबाव, संस्थागत धमकियों और जन-लोकप्रियता की मांग से ऊपर उठकर निष्पक्ष निर्णय लेना चाहिए।
न्यायमूर्ति नागरत्ना केरल उच्च न्यायालय में आयोजित द्वितीय टी.एस. कृष्णमूर्ति अय्यर मेमोरियल लेक्चर में संबोधित कर रही थीं। इस दौरान उन्होंने कहा कि एक न्यायाधीश का कर्तव्य है कि वह न्याय के सिद्धांतों के अनुरूप फैसला दे, भले ही उसके कारण उसके करियर की उन्नति प्रभावित हो जाए या सत्ता में बैठे लोग नाराज क्यों न हो जाएं।
उन्होंने कहा, “जजों को सही फैसला लेने में संकोच नहीं करना चाहिए, चाहे उसके कारण उनकी पदोन्नति रुक जाए या सत्ता प्रतिष्ठान असंतुष्ट हो जाए।”
मीडिया की स्वतंत्रता पर भी जताई चिंता
इससे पहले पत्रकारिता के क्षेत्र में उत्कृष्टता के लिए आयोजित आईपीआई इंडिया अवॉर्ड फॉर एक्सीलेंस इन जर्नलिज्म 2025 समारोह में भी न्यायमूर्ति नागरत्ना ने मीडिया की स्वतंत्रता को लेकर चिंता व्यक्त की थी। उन्होंने कहा कि प्रेस पर नियंत्रण स्थापित करने के प्रयासों के पीछे केवल आर्थिक कारण ही नहीं, बल्कि राजनीतिक हित भी जुड़े होते हैं।
उन्होंने कहा कि मीडिया तभी अपनी जिम्मेदारी निभा सकता है जब वह किसी भी प्रकार के भय, दबाव या प्रभाव से मुक्त हो। उनके अनुसार आज के समय में प्रेस की स्वतंत्रता को सबसे बड़ा खतरा प्रत्यक्ष सेंसरशिप से नहीं, बल्कि आर्थिक नीतियों, कड़े लाइसेंस नियमों और मीडिया संस्थानों के स्वामित्व ढांचे से है।
न्यायमूर्ति नागरत्ना ने कहा, “किसी मीडिया संस्थान को कानूनी रूप से सरकार की आलोचना करने की स्वतंत्रता भले ही हो, लेकिन आर्थिक दबावों के कारण ऐसी आलोचना करना उसके लिए महंगा पड़ सकता है।”
संविधान में प्रेस की स्वतंत्रता
उन्होंने बताया कि भारत में प्रेस की स्वतंत्रता की संवैधानिक स्थिति विशेष है। यह अधिकार सीधे तौर पर संविधान के अनुच्छेद 19(1)(ए) यानी अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता और अनुच्छेद 19(1)(जी) यानी किसी भी पेशे, व्यापार या व्यवसाय को करने की स्वतंत्रता के बीच संतुलन से विकसित होता है।
कार्यक्रम की मुख्य अतिथि न्यायमूर्ति नागरत्ना ने कहा कि लोकतंत्र को मजबूत बनाए रखने के लिए स्वतंत्र और निष्पक्ष मीडिया अत्यंत आवश्यक है।
गौरतलब है कि न्यायमूर्ति नागरत्ना सितंबर 2027 में भारत की पहली महिला प्रधान न्यायाधीश बनने वाली हैं।













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