जयपुर : आचार्य श्री महाश्रमण जी के सुशिष्य मुनि श्री तत्त्व रुचि ‘तरुण’ ने कहा कि धैर्य विवेकवान व्यक्ति का विशिष्ट गुण है। धैर्यपूर्वक किया गया कार्य न केवल सुंदर होता है, बल्कि कल्याणकारी भी सिद्ध होता है। उन्होंने कहा कि जल्दबाजी का अर्थ किसी कार्य को जैसे-तैसे पूरा करना है, जबकि ऐसे कार्यों में न तो उत्कृष्टता होती है और न ही सफलता। जल्दबाजी शैतान की पहचान है, जबकि सफलता सदैव धैर्य रखने वालों के कदम चूमती है।
निर्माण नगर स्थित महाप्रज्ञ इंटरनेशनल स्कूल के संबोधि सभागार में आयोजित धर्मसभा को संबोधित करते हुए मुनि श्री ने आगम ग्रंथों की शिक्षाओं का उल्लेख करते हुए कहा कि विवेकयुक्त आचरण व्यक्ति को अनावश्यक कर्मबंध से बचाता है। पाप का संबंध प्रमाद और अविवेक से है। जहाँ विवेक का अभाव होता है, वहाँ धार्मिक क्रियाएं भी कर्मबंध का कारण बन सकती हैं।
इस अवसर पर मुनि संभव कुमार ने कहा कि हड़बड़ी से सदैव गड़बड़ी उत्पन्न होती है। जीवन में धैर्य का फल सदैव मधुर होता है। कोई भी व्यक्ति एक दिन में गुणवान नहीं बन जाता और न ही बीज बोते ही फल प्राप्त हो जाता है। प्रत्येक सफलता समय की मांग करती है तथा समय से पूर्व किसी को कुछ भी प्राप्त नहीं होता।
उन्होंने कहा कि अधीरता जीवन में अनेक प्रकार के नुकसान का कारण बनती है, जबकि धैर्य बड़े लाभ का द्वार खोलता है। जल्दबाजी को पछतावे की बहन बताते हुए उन्होंने कहा कि जो व्यक्ति जल्दबाजी करता है, वह सफलता से तो वंचित रहता ही है, बाद में उसे पश्चाताप भी करना पड़ता है। वर्तमान समय में गति को ही जीवन की पहचान माना जाने लगा है, किंतु गति और स्थिरता के बीच संतुलन बनाए रखना आवश्यक है।
धर्मसभा का शुभारंभ तीर्थंकर सुपार्श्व प्रभु की स्तुति से हुआ। कार्यक्रम के दौरान भावों की शुद्धता और मानसिक स्वस्थता के लिए ध्यान का अभ्यास कराया गया तथा त्याग और वैराग्य की भावना को विकसित करने का संदेश भी दिया गया। मंगलपाठ के साथ कार्यक्रम का समापन हुआ।
मुनि तत्त्व रुचि ‘तरुण’ एवं मुनि संभव कुमार रविवार प्रातः 6:30 बजे महाप्रज्ञ इंटरनेशनल स्कूल से विहार कर अजमेर रोड स्थित तिवाड़ी कॉलोनी पधारेंगे। संतों का 7 जून का प्रवास वहीं रहेगा। रविवारीय प्रवचन प्रातः 9 बजे से 10 बजे तक तिवाड़ी कॉलोनी में आयोजित होगा।













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