डेस्क : भारतीय आईटी सेवा क्षेत्र को आने वाले समय में धीमी वृद्धि और मार्जिन दबाव के लंबे दौर का सामना करना पड़ सकता है। एक ब्रोकरेज रिपोर्ट के अनुसार, कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) आधारित निवेश प्राथमिकताओं के कारण पारंपरिक आईटी सेवाओं पर खर्च घट रहा है और वित्त वर्ष 2027 तक किसी बड़े सुधार के संकेत नहीं दिख रहे हैं।
रिपोर्ट में कहा गया है कि कुल तकनीकी खर्च भले बढ़ रहा हो, लेकिन अतिरिक्त निवेश अब जीपीयू इंफ्रास्ट्रक्चर, फाउंडेशन मॉडल्स और एआई सॉफ्टवेयर की ओर जा रहा है। इससे भारतीय आईटी कंपनियों के लिए उपलब्ध सेवा बाजार का हिस्सा सिकुड़ रहा है।
ब्रोकरेज के अनुसार, एआई के कारण कीमतों में गिरावट अब वास्तविकता बनती जा रही है। उद्योग के लिए आधार अनुमान 3.5 प्रतिशत तक मूल्य क्षरण का है, जो बड़े बहुवर्षीय अनुबंधों के नवीनीकरण के दौरान दिखाई देगा। रिपोर्ट में कहा गया है कि ग्राहक चाहते हैं कि एआई से मिलने वाली दक्षता का लाभ मौजूदा अनुबंधों की कीमतों में कमी के रूप में दिया जाए। इससे कंपनियों के राजस्व और मार्जिन दोनों पर नकारात्मक असर पड़ेगा।
मार्च तिमाही के नतीजों ने इस चुनौती को और स्पष्ट कर दिया है। रिपोर्ट के अनुसार, टाटा कंसल्टेंसी सर्विसेज (Tata Consultancy Services) को छोड़कर अधिकांश बड़ी कंपनियों के नतीजे बाजार अनुमान से कमजोर रहे। HCL Technologies पहली कंपनी रही जिसने उद्योग में 3 से 5 प्रतिशत एआई आधारित मूल्य दबाव का खुला उल्लेख किया।
रिपोर्ट में कहा गया है कि अब बड़ी कंपनियों के बीच बाजार हिस्सेदारी बढ़ाने का दौर समाप्त होता दिख रहा है। वित्त वर्ष 2027 में शीर्ष कंपनियों की वृद्धि दर 1 से 4 प्रतिशत के बीच सीमित रह सकती है। Tata Consultancy Services ने 12 अरब डॉलर के बड़े सौदे हासिल किए हैं, जबकि Tech Mahindra ने दूरसंचार क्षेत्र में नए बड़े अनुबंध जीते हैं।
विश्लेषकों का मानना है कि अब सभी कंपनियां एक ही बाजार, एक ही सौदों और समान उत्पादकता मानकों पर प्रतिस्पर्धा कर रही हैं। ऐसे में कुल सेवा बाजार का आकार पर्याप्त गति से नहीं बढ़ रहा, जिससे प्रतिस्पर्धा और तेज होगी।
हालांकि रिपोर्ट में कुछ सकारात्मक संकेत भी दिए गए हैं। एआई आधारित मूल्य दबाव को स्थायी नहीं बल्कि चक्रीय बताया गया है। अगले 2 से 3 वर्षों में डेटा आर्किटेक्चर, एजेंटिक वर्कफ्लो और एआई गवर्नेंस जैसे नए क्षेत्रों में मांग बढ़ सकती है। मध्यम आकार की कंपनियां इस अवसर का बेहतर लाभ उठा सकती हैं।
क्षेत्रवार दृष्टि से वित्तीय सेवाएं, ऊर्जा और यूटिलिटी सेक्टर अभी भी मजबूत बने हुए हैं, जबकि बड़े सौदों का प्रवाह जारी है।
रिपोर्ट के अनुसार, वैश्विक आईटी सेवाओं की औसत वृद्धि दर पिछले दशक में 5 प्रतिशत रही, लेकिन 2025 में यह घटकर 3 प्रतिशत रह गई और 2026 तक भी सीमित दायरे में रहने की संभावना है। इसके बावजूद ब्रोकरेज का मानना है कि 3 प्रतिशत वृद्धि दर पर भी आईटी सेवा क्षेत्र निवेश योग्य बना रहेगा। चुनौती यह नहीं है कि वृद्धि समाप्त हो रही है, बल्कि यह है कि बाजार का कुल आकार धीमी गति से बढ़ रहा है जबकि प्रतिस्पर्धा लगातार तीव्र हो रही है।













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