स्पोर्ट्स डेस्क : एथलेटिक्स फेडरेशन ऑफ इंडिया (एएफआई) ने महिला वर्ग में प्रतिस्पर्धा करने वाले खिलाड़ियों के लिए अनिवार्य एसआरवाई जीन परीक्षण को लागू करने का पूरा खर्च वहन करने का निर्णय लिया है। यह कदम विश्व एथलेटिक्स द्वारा लागू किए गए नए वैश्विक पात्रता नियमों के अनुरूप है।
शनिवार को आयोजित एक प्रेस वार्ता में एएफआई के प्रवक्ता और विश्व एथलेटिक्स के उपाध्यक्ष अदिले सुमरिवाला ने बताया कि यह परीक्षण पहले ही शुरू किया जा चुका है। इसका निर्णय 14 और 15 अप्रैल को कोहिमा में हुई एएफआई की वार्षिक आम बैठक में लिया गया था।
उन्होंने कहा, “महिला वर्ग में अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिताओं में भाग लेने के लिए एसआरवाई जीन परीक्षण अनिवार्य है। यह एक बार किया जाने वाला परीक्षण है और एएफआई इसकी लागत वहन करेगा, ताकि किसी भी खिलाड़ी पर आर्थिक बोझ न पड़े।”
सुमरिवाला ने बताया कि फेडरेशन ने मान्यता प्राप्त प्रयोगशालाओं के साथ बातचीत कर परीक्षण की लागत 8,000 रुपये से घटाकर 3,500 रुपये प्रति खिलाड़ी कर दी है।
यह निर्णय विश्व एथलेटिक्स द्वारा 1 सितंबर 2025 से लागू किए गए नए नियमों के बाद लिया गया है, जिसे सबसे पहले टोक्यो 2025 विश्व एथलेटिक्स चैंपियनशिप में लागू किया गया था। इस नियम के तहत विश्व रैंकिंग प्रतियोगिताओं में महिला वर्ग में भाग लेने वाली सभी खिलाड़ियों के लिए एक बार एसआरवाई जीन परीक्षण अनिवार्य किया गया है, जिसे जैविक लिंग निर्धारण का विश्वसनीय संकेतक माना जाता है।
एएफआई के अनुसार, वह अपने चिकित्सा आयोग द्वारा चिन्हित प्रयोगशालाओं के साथ सीधे समन्वय करेगा और खिलाड़ियों की ओर से भुगतान भी करेगा। सुमरिवाला ने कहा, “हम परीक्षण प्रक्रिया पर कड़ी निगरानी रखेंगे ताकि किसी भी प्रकार की पहचान संबंधी अनियमितता न हो।”
उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि खिलाड़ियों की गोपनीयता सर्वोच्च प्राथमिकता है। उन्होंने कहा, “जैसे ही परिणाम विश्व एथलेटिक्स के डेटाबेस में अपलोड किए जाएंगे, उन्हें नष्ट कर दिया जाएगा ताकि पूर्ण गोपनीयता बनी रहे।”
यह परीक्षण चीक स्वैब या रक्त नमूने के माध्यम से किया जा सकता है और इसे इस सत्र के प्रमुख घरेलू प्रतियोगिताओं—रांची, भुवनेश्वर, लुधियाना और दिल्ली में आयोजित राष्ट्रीय स्तर के आयोजनों—में चरणबद्ध तरीके से लागू किया जाएगा।
एएफआई ने दोहराया कि यह अनिवार्य परीक्षण पूरा किए बिना किसी भी खिलाड़ी को महिला वर्ग में अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिताओं में भाग लेने की अनुमति नहीं दी जाएगी।













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