स्पोर्ट्स डेस्क : पूर्व भारतीय बैडमिंटन खिलाड़ी सायना नेहवाल ने कहा है कि उन्हें उम्मीद थी कि महिला आरक्षण विधेयक पास हो जाएगा और यह देश के लिए एक सकारात्मक कदम होता।
विधेयक के पारित न हो पाने के बाद सायना ने प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि जिस तरह महिलाएँ हर क्षेत्र में आगे बढ़ रही हैं, राजनीति में उनकी अधिक भागीदारी भी देश के लिए लाभकारी होती। उन्होंने यह भी उम्मीद जताई कि भविष्य में यह विधेयक जरूर पास होगा।
पत्रकारों से बातचीत में सायना नेहवाल ने कहा,
“मुझे उम्मीद थी कि यह विधेयक पास हो जाएगा। यह हमारे देश के लिए अच्छी बात होती। हमारे देश की महिलाएँ हर क्षेत्र में प्रगति कर रही हैं और राजनीति में उनकी भागीदारी और बढ़नी चाहिए। मुझे उम्मीद है कि भविष्य में यह विधेयक पास होगा।”
प्रस्तावित महिला आरक्षण विधेयक के तहत लोकसभा की मौजूदा 543 सीटों में 33 प्रतिशत आरक्षण देने और इसी तरह की व्यवस्था राज्यों की विधानसभाओं, दिल्ली और पुडुचेरी सहित केंद्र शासित प्रदेशों तथा जम्मू-कश्मीर में लागू करने का प्रावधान था। इसके साथ ही संविधान (एक सौ इकतीसवाँ संशोधन) विधेयक 2026, संघ राज्य क्षेत्र कानून (संशोधन) विधेयक 2026 और परिसीमन विधेयक 2026 भी इससे जुड़े थे, जिनका उद्देश्य लोकसभा सीटों की संख्या को बढ़ाकर 850 तक करना था।
हालाँकि शुक्रवार को लोकसभा में विपक्षी दलों ने इस संविधान संशोधन विधेयक के खिलाफ मतदान किया। तीनों विधेयकों को एक साथ सदन में पेश किया गया था। बहस के बाद हुई वोटिंग में संविधान संशोधन विधेयक के पक्ष में 298 और विपक्ष में 230 मत पड़े, लेकिन यह पारित नहीं हो सका।
विधेयक के गिरने के बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने विपक्ष पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि सरकार के गंभीर प्रयासों के बावजूद विपक्ष ने महिला आरक्षण विधेयक को रोककर महिलाओं के सपनों को कुचल दिया है।
प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि यह पराजय महिलाओं के आत्मसम्मान पर सीधा प्रहार है और देश की महिला मतदाता इसे कभी नहीं भूलेंगी। उन्होंने कहा, “महिलाएँ भले ही बाकी बातें भूल जाएँ, लेकिन अपने सम्मान पर हुए अपमान को नहीं भूलतीं।”
प्रधानमंत्री ने आगे कहा कि विपक्ष को इस ‘पाप’ की सजा जनता देगी। उन्होंने यह भी कहा कि भारत की महिलाएँ राजनीतिक दलों के इरादों को अच्छी तरह समझती हैं और भविष्य में जवाब जरूर देंगी।
नारी शक्ति वंदन अधिनियम के उद्देश्य को रेखांकित करते हुए प्रधानमंत्री ने कहा कि यह विधेयक लंबे समय से लंबित अधिकार देने और देश की आधी आबादी को नए अवसर प्रदान करने का प्रयास था। उन्होंने कहा कि इसका उद्देश्य बाधाओं को हटाकर महिलाओं को विकास यात्रा में समान भागीदार बनाना था।













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