डेस्क : ईरान और अमेरिका के बीच जारी तनाव तथा होर्मुज जलडमरूमध्य क्षेत्र में उत्पन्न अस्थिरता का असर अब वैश्विक आपूर्ति शृंखला पर दिखाई देने लगा है। इसका सबसे अधिक प्रभाव सल्फर की आपूर्ति पर पड़ा है, जिससे उर्वरक उद्योग और कृषि क्षेत्र प्रभावित हो रहे हैं।
सल्फर, फास्फेट और नाइट्रोजन आधारित उर्वरकों के उत्पादन में एक महत्वपूर्ण कच्चा पदार्थ है। वैश्विक स्तर पर सल्फर का बड़ा हिस्सा मध्य-पूर्व क्षेत्र से समुद्री मार्गों के माध्यम से विभिन्न देशों तक पहुंचता है। मौजूदा हालात के कारण इस मार्ग से होने वाला व्यापार बाधित हुआ है, जिससे आपूर्ति में कमी दर्ज की जा रही है।
आपूर्ति बाधित होने के चलते अंतरराष्ट्रीय बाजार में सल्फर और उससे जुड़े उर्वरकों की कीमतों में तेजी देखी जा रही है। उद्योग विशेषज्ञों के अनुसार कच्चे माल की उपलब्धता प्रभावित होने से उर्वरक उत्पादन की लागत में भी वृद्धि हुई है।
भारत, जो दुनिया के प्रमुख उर्वरक उपभोक्ता देशों में शामिल है, इस स्थिति से प्रभावित हो रहा है। बाजार में उर्वरक कीमतों में बढ़ोतरी की आशंका के बीच आगामी कृषि सीजन को लेकर किसानों में चिंता देखी जा रही है। छोटे और सीमांत किसानों पर इसका अधिक प्रभाव पड़ने की संभावना जताई जा रही है, क्योंकि उनकी उत्पादन लागत पहले से ही सीमित संसाधनों पर आधारित है।
कृषि क्षेत्र से जुड़े विशेषज्ञों का कहना है कि यदि वैश्विक आपूर्ति शृंखला में यह व्यवधान लंबे समय तक जारी रहता है, तो इसका असर उर्वरक उपलब्धता और वितरण व्यवस्था पर पड़ सकता है। इसके साथ ही कृषि उत्पादन लागत में भी वृद्धि की स्थिति बन सकती है।
अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी इस संकट को लेकर निगरानी बढ़ा दी गई है। विभिन्न देशों में उर्वरक और कृषि इनपुट की आपूर्ति व्यवस्था पर इसका प्रभाव देखा जा रहा है, जिससे वैश्विक बाजार में अस्थिरता बनी हुई है।













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