डेस्क : पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव के बीच ईरान द्वारा अमेरिका को भेजा गया नया शांति प्रस्ताव भी सफल नहीं हो सका। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान के प्रस्ताव को तत्काल खारिज करते हुए इसे “पूर्णतः अस्वीकार्य” करार दिया। इसके साथ ही दोनों देशों के बीच टकराव कम होने की उम्मीदों को बड़ा झटका लगा है।
मीडिया रिपोर्टों के अनुसार ईरान ने पाकिस्तान की मध्यस्थता के माध्यम से अमेरिका तक यह प्रस्ताव पहुंचाया था। प्रस्ताव में क्षेत्रीय युद्धविराम, लेबनान में संघर्ष समाप्त करने, होर्मुज जलडमरूमध्य में सुरक्षित समुद्री आवाजाही सुनिश्चित करने तथा ईरान पर लगे अमेरिकी प्रतिबंध हटाने जैसी मांगें शामिल थीं।
सूत्रों के अनुसार तेहरान ने यह भी कहा कि युद्ध और प्रतिबंधों से हुई आर्थिक क्षति की भरपाई की जाए। साथ ही ईरान ने अपने उच्च संवर्धित यूरेनियम भंडार के एक हिस्से को किसी तीसरे देश को सौंपने का संकेत दिया, लेकिन अपने परमाणु ढांचे को समाप्त करने से स्पष्ट इनकार कर दिया।
वहीं अमेरिकी प्रशासन का रुख अब भी अत्यंत कठोर बना हुआ है। डोनाल्ड ट्रंप ने कहा कि अमेरिका ईरान की शर्तों के आगे नहीं झुकेगा और उसकी परमाणु गतिविधियों पर पूर्ण नियंत्रण आवश्यक है। दूसरी ओर इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने भी दोहराया कि जब तक ईरान का परमाणु तंत्र पूरी तरह समाप्त नहीं किया जाता, तब तक क्षेत्र में स्थायी शांति संभव नहीं है।
विशेषज्ञों का मानना है कि दोनों देशों के बीच जारी यह गतिरोध वैश्विक ऊर्जा बाजार पर भी प्रभाव डाल सकता है। होर्मुज जलडमरूमध्य में तनाव बढ़ने की आशंका के चलते अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में तेजी देखी जा रही है।
राजनयिक सूत्रों के अनुसार अमेरिका और ईरान के बीच फिलहाल किसी प्रत्यक्ष वार्ता की संभावना अत्यंत कमजोर दिखाई दे रही है, जिससे पश्चिम एशिया में अस्थिरता और बढ़ सकती है।













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