अमेरिका ने अपने पायलट को ईरान के पहाड़ी इलाके में दो दिन तक छिपे रहने के बाद सकुशल बचा लिया। यह अभियान किसी चमत्कार से कम नहीं था, क्योंकि यह मिशन उस देश में अंजाम दिया गया, जिसके साथ अमेरिका पिछले एक महीने से संघर्षरत था। अमेरिकी विमानों के दर्जनों स्क्वॉड्रन हवा में गश्त करते रहे, लेकिन पायलट की सही लोकेशन बताने में एक छोटी सी डिवाइस ने निर्णायक भूमिका निभाई। इस डिवाइस के जरिए पता चला कि पायलट उबड़-खाबड़ पहाड़ी दरार में छिपा हुआ है।
मिशन की सफलता का रहस्य: CSEL डिवाइस
इस अभियान के केंद्र में लगभग 800 ग्राम वजन वाली सैटेलाइट-आधारित कम्युनिकेशन डिवाइस थी, जिसे CSEL (कॉम्बैट सरवाइवर इवेडर लोकेटर) कहा जाता है। Ynetnews के अनुसार, इसे बोइंग कंपनी ने विकसित किया है और यह सैटेलाइट से जुड़ी रहती है। यह हथेली के आकार की होती है और मजबूत सैन्य रेडियो और हैंडहेल्ड कंप्यूटर का मिश्रण प्रतीत होती है।
डिवाइस पायलट के कमर के पास बांधी जाती है ताकि अगर पायलट फाइटर जेट से इजेक्ट करे तो यह उसके साथ रहे। जैसे ही पायलट इजेक्ट करता है, यह तुरंत एन्क्रिप्टेड डेटा भेजना शुरू कर देती है। तेज़ फ्रीक्वेंसी-हॉपिंग सिग्नलों का इस्तेमाल करते हुए यह लगातार लोकेशन कोऑर्डिनेट्स और छोटे एन्क्रिप्टेड संदेश भेजती रहती है, जिससे दुश्मन के इलेक्ट्रॉनिक वॉरफेयर सिस्टम के लिए इसे ट्रैक करना मुश्किल हो जाता है।
कठिन परिस्थितियों में भी काम करती है डिवाइस
CSEL किसी भी परिस्थिति में काम करती है। जैसे विमान के ब्लैक बॉक्स में अंतिम क्षण दर्ज होते हैं, वैसे ही यह डिवाइस पायलट या सैनिक से जुड़ी रहती है। इसी के जरिए अमेरिकी सेना ने पायलट की लोकेशन ट्रैक की। यह डिवाइस 10 मीटर तक पानी में डूबे रहने के बावजूद सही लोकेशन भेजती है और इसकी बैटरी 21 दिनों तक चलती है। इसमें लगे बटन के माध्यम से पायलट या सैनिक संकट की सूचना दे सकता है, जिससे बचाव प्रक्रिया शुरू होती है। इस मिशन के दौरान डिवाइस ने हर कुछ घंटों में सटीक एन्क्रिप्टेड लोकेशन भेजी, जिससे ईरानी सेना पायलट का पता नहीं लगा सकी।
पायलट छिपा था पहाड़ी दरार में
The New York Times के अनुसार, अमेरिकी वायुसेना के पायलट का F-15 जेट ईरान में मार गिराया गया था। दुश्मन से बचने के लिए पायलट ने एक पहाड़ी दरार में छिपकर 7,000 फीट की ऊंचाई तक चढ़ाई की। दो दिन तक चले खतरनाक मिशन के बाद अमेरिकी सेना ने उसे सुरक्षित बचा लिया।
रविवार को अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने इस बचाव अभियान को साहस और कुशलता का अद्भुत उदाहरण बताया। उन्होंने पोस्ट में कहा, “हमने ईरान के पहाड़ों की गहराई से एक गंभीर रूप से घायल और वास्तव में बहादुर F-15 क्रू मेंबर/अधिकारी को बचा लिया। ईरानी सेना बड़ी संख्या में उसकी तलाश कर रही थी और उसके काफी करीब पहुंच गई थी।”













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