डेस्क : पश्चिम बंगाल में मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) प्रक्रिया से जुड़े मामले में सुप्रीम कोर्ट ने महत्वपूर्ण टिप्पणी करते हुए उन मतदाताओं को फिलहाल कोई राहत देने से इनकार कर दिया है, जिनके नाम इस प्रक्रिया के दौरान सूची से हटाए गए हैं।
सुनवाई के दौरान शीर्ष अदालत ने स्पष्ट किया कि जिन लोगों के नाम मतदाता सूची से हटाए गए हैं, उन्हें तत्काल राहत या सूची में बहाल करने का कोई अंतरिम आदेश नहीं दिया जा सकता। अदालत ने कहा कि ऐसे मामलों में तय कानूनी प्रक्रिया और अपीलीय तंत्र का पालन करना ही उचित मार्ग है।
हालांकि, अदालत ने यह भी माना कि एसआईआर प्रक्रिया में “त्रुटि की संभावना (margin of error)” से इनकार नहीं किया जा सकता। अदालत ने यह टिप्पणी करते हुए कहा कि मतदाता सूची की शुद्धता बनाए रखना जरूरी है, लेकिन साथ ही यह भी सुनिश्चित होना चाहिए कि कोई वास्तविक मतदाता गलत तरीके से वंचित न रह जाए।
शीर्ष अदालत ने आगे यह भी कहा कि इस तरह के विवादों के लिए एक मजबूत और प्रभावी अपीलीय तंत्र होना चाहिए, ताकि जिन लोगों के नाम हटाए गए हैं वे उचित दस्तावेजों के साथ अपनी दलील रख सकें।
इस मामले में अदालत ने फिलहाल सीधे हस्तक्षेप से इनकार करते हुए याचिकाकर्ताओं को संबंधित ट्रिब्यूनल में जाने की सलाह दी है। इससे पहले भी अदालत एसआईआर प्रक्रिया को बाधित न करने और मतदाता सूची सुधार कार्य को जारी रखने के पक्ष में रुख दिखा चुकी है।
गौरतलब है कि पश्चिम बंगाल में एसआईआर प्रक्रिया के तहत बड़ी संख्या में नाम हटाए जाने को लेकर राजनीतिक और कानूनी बहस तेज है, और कई याचिकाएँ अभी भी न्यायिक समीक्षा के अधीन हैं।













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