नई दिल्ली :सुप्रीम कोर्ट ने चुनाव आयोग की ‘स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन’ (एसआईआर) प्रक्रिया को वैध ठहराते हुए इससे संबंधित सभी याचिकाओं को खारिज कर दिया। अदालत ने कहा कि मतदाता सूची को शुद्ध और अद्यतन बनाए रखना चुनाव आयोग की संवैधानिक जिम्मेदारी है और इसके लिए आयोग को आवश्यक अधिकार प्राप्त हैं।
मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत और न्यायमूर्ति जॉयमाल्या बागची की पीठ ने सुनवाई के दौरान कहा कि चुनाव आयोग संविधान के अनुच्छेद 324 के तहत मतदाता सूची के पुनरीक्षण और सत्यापन की प्रक्रिया चला सकता है। अदालत ने माना कि एसआईआर प्रक्रिया किसी भी संवैधानिक प्रावधान का उल्लंघन नहीं करती।
याचिकाकर्ताओं ने अदालत में दलील दी थी कि इस प्रक्रिया से गरीब, प्रवासी और दस्तावेजों के अभाव वाले मतदाताओं को परेशानी हो सकती है। उनका कहना था कि विशेष पुनरीक्षण की आड़ में बड़ी संख्या में लोगों के नाम मतदाता सूची से हटाए जा सकते हैं। कुछ याचिकाओं में इसे एनआरसी जैसी प्रक्रिया बताया गया था।
वहीं चुनाव आयोग ने अदालत में कहा कि एसआईआर का उद्देश्य केवल फर्जी, मृत अथवा दोहरे मतदाताओं की पहचान कर मतदाता सूची को अधिक पारदर्शी और त्रुटिरहित बनाना है। आयोग के अनुसार पिछले कई वर्षों में बड़े पैमाने पर जनसंख्या परिवर्तन और रिकॉर्ड संबंधी विसंगतियां सामने आई हैं, जिसके कारण विशेष पुनरीक्षण आवश्यक हो गया था।
सुप्रीम कोर्ट ने अपने फैसले में यह भी स्पष्ट किया कि किसी व्यक्ति का नाम मतदाता सूची से हटना उसकी नागरिकता समाप्त होने के समान नहीं माना जा सकता। नागरिकता से संबंधित अंतिम निर्णय केवल सक्षम प्राधिकारी ही कर सकता है।
गौरतलब है कि बिहार में शुरू हुई एसआईआर प्रक्रिया को बाद में पश्चिम बंगाल सहित कई राज्यों में लागू किया गया था। इस प्रक्रिया को लेकर राजनीतिक दलों और सामाजिक संगठनों के बीच तीखी बहस छिड़ गई थी।













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