डेस्क : हज यात्रा 2026 के लिए यात्रियों से अतिरिक्त 10,000 रुपये वसूले जाने के परिपत्र को लेकर देश की राजनीति गरमा गई है। भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस ने इस फैसले का तीखा विरोध करते हुए केंद्र सरकार से इसे तत्काल वापस लेने की मांग की है।
मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, हज समिति द्वारा जारी परिपत्र में प्रत्येक यात्री से करीब 100 अमेरिकी डॉलर (लगभग 10 हजार रुपये) अतिरिक्त जमा करने को कहा गया है। यह राशि हवाई किराए में बढ़ोतरी के कारण ली जा रही है।
कांग्रेस का हमला
कांग्रेस ने इस निर्णय को “अन्यायपूर्ण और असंवेदनशील” बताते हुए कहा कि पहले ही पूरी राशि जमा कर चुके यात्रियों पर अचानक अतिरिक्त बोझ डालना गलत है। पार्टी नेताओं का कहना है कि हज यात्रा में जाने वाले अधिकांश लोग मध्यम और निम्न आय वर्ग से आते हैं, जिन पर इस तरह की अचानक आर्थिक मार अनुचित है।
कांग्रेस ने आरोप लगाया कि बिना पूर्व सूचना और पारदर्शिता के यह फैसला लिया गया है, जिससे यात्रियों और उनके परिवारों में असंतोष पैदा हो रहा है।
सरकार का पक्ष
वहीं केंद्र सरकार का कहना है कि अंतरराष्ट्रीय परिस्थितियों और विमान ईंधन की बढ़ती कीमतों के कारण हवाई किराए में वृद्धि हुई है। सरकार के अनुसार, एयरलाइनों ने इससे कहीं अधिक बढ़ोतरी की मांग की थी, लेकिन बातचीत के बाद इसे सीमित कर दिया गया।
सरकार ने इसे असाधारण परिस्थितियों में लिया गया आवश्यक निर्णय बताया है और कहा है कि यात्रियों के हितों को ध्यान में रखते हुए न्यूनतम बढ़ोतरी लागू की गई है।
बढ़ता राजनीतिक विवाद
इस मुद्दे ने अब राजनीतिक रंग ले लिया है। विपक्ष जहां इसे आम लोगों पर आर्थिक बोझ बताकर सरकार को घेर रहा है, वहीं सरकार इसे वैश्विक परिस्थितियों से जुड़ा आवश्यक कदम बता रही है।
विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाले दिनों में यह मामला और तूल पकड़ सकता है, खासकर तब जब बड़ी संख्या में हज यात्री इस निर्णय से सीधे प्रभावित हो रहे हैं।













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