कोलकाता: पश्चिम बंगाल में पिछले लगभग 15 वर्षों से मुस्लिम मतदाता तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) की चुनावी ताकत का मुख्य आधार रहे हैं। लेकिन आगामी 2026 के विधानसभा चुनावों में यह समीकरण बदलता हुआ नजर आ रहा है। टीएमसी से निष्कासित होने के बाद मुर्शिदाबाद के नेता हुमायूं कबीर ने अपनी नई पार्टी “आम जनता उन्नयन पार्टी” (एजेयूपी) बनाई और ऑल इंडिया मजलिस-ए-इत्तेहादुल मुस्लिमिन (एआईएमआईएम) के साथ गठबंधन कर लिया है। इसके अलावा इंडियन सेक्युलर फ्रंट (आईएसएफ) और कांग्रेस की सक्रियता ने मुस्लिम वोटों के राजनीतिक गणित में नई अनिश्चितता पैदा कर दी है।
विश्लेषकों के अनुसार, राज्य की 294 विधानसभा सीटों में से 114 से अधिक सीटों पर लगभग 30 प्रतिशत मुस्लिम मतदाता चुनाव नतीजों को प्रभावित कर सकते हैं। राजनीतिक विशेषज्ञ विश्वनाथ चक्रवर्ती ने कहा, “पहले मुस्लिम मतदाता सहज रूप से तृणमूल के साथ खड़े रहते थे। लेकिन अब छोटे दलों के उभार और स्थानीय शिकायतें सत्तारूढ़ पार्टी के लिए चुनौती बन सकती हैं।”
छोटे दलों की भूमिका
उत्तर और दक्षिण बंगाल के मुस्लिम बहुल जिलों में छोटे दल सक्रिय हो चुके हैं। आईएसएफ के नेता नौशाद सिद्दीकी युवा मुस्लिम मतदाताओं को जोड़ने का प्रयास कर रहे हैं। सिद्दीकी ने आरोप लगाया कि तृणमूल और भाजपा केवल चुनावी मौके पर अल्पसंख्यकों का राजनीतिक इस्तेमाल करते हैं।
मुर्शिदाबाद के हुमायूं कबीर का जोर भी महत्वपूर्ण है। उन्होंने कहा कि नई बाबरी मस्जिद का निर्माण और मुस्लिम समुदाय में बढ़ती राजनीतिक चेतना 2026 के चुनावों में निर्णायक भूमिका निभा सकती है। कबीर का दावा है कि उनकी पार्टी 182 सीटों पर चुनाव लड़ेगी और खंडित जनादेश की स्थिति में ‘किंगमेकर’ बन सकती है।
कबीर ने कहा, “बंगाल में मुस्लिमों की आबादी लगभग 30 प्रतिशत है, लेकिन उन्हें पर्याप्त प्रतिनिधित्व नहीं मिला। हमारी पार्टी में 100 से अधिक मुस्लिम उम्मीदवार होंगे, जो इस दिशा में हमारी गंभीरता को दिखाता है।”
कांग्रेस और भाजपा की रणनीति
कांग्रेस भी मालदा और मुर्शिदाबाद में पारंपरिक गढ़ में पुनः सक्रिय हो रही है। अधीर रंजन चौधरी ने कहा कि अल्पसंख्यक मतदाता अपनी राजनीतिक पसंद पर विचार कर रहे हैं।
भाजपा नेता शुभेंदु अधिकारी का दावा है कि इस बार मुस्लिम वोट बंट सकते हैं। उन्होंने कहा कि कुछ मुस्लिम मतदाताओं ने टीएमसी पर भरोसा खो दिया है। इसके पीछे मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) की प्रक्रिया भी एक कारक है।
जिलास्तरीय आंकड़े बताते हैं कि मुर्शिदाबाद में 11 लाख से अधिक, मालदा में 8.28 लाख, उत्तर 24 परगना में 5.91 लाख और दक्षिण 24 परगना में 5.22 लाख मतदाता इस प्रक्रिया से गुजर रहे हैं। ये जिले लगभग 100 विधानसभा सीटों का प्रतिनिधित्व करते हैं और ऐतिहासिक रूप से टीएमसी का मजबूत गढ़ रहे हैं।
टीएमसी का रुख
हालांकि, राज्य के मंत्री फिरहाद हाकिम ने विश्वास जताया कि अल्पसंख्यक अंततः टीएमसी के साथ खड़े रहेंगे। उन्होंने कहा, “मुस्लिम समुदाय जानता है कि पिछले 15 वर्षों में केवल तृणमूल ने लगातार उनके हितों की रक्षा की है। छोटे दल अप्रत्यक्ष रूप से भाजपा की मदद कर रहे हैं, लेकिन अंततः अल्पसंख्यक तृणमूल के साथ खड़े रहेंगे।”













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