मुंबई : बॉम्बे हाई कोर्ट ने रमजान के दौरान शहर के हवाई अड्डे के पास नमाज पढ़ने की अनुमति मांग रहे टैक्सी और ऑटो-रिक्शा चालकों को राहत देने से इनकार कर दिया। अदालत ने स्पष्ट कहा कि सुरक्षा से जुड़ा मामला होने पर धर्म के आधार पर किसी प्रकार की छूट नहीं दी जा सकती।
न्यायमूर्ति बी.पी. कोलाबावाला और न्यायमूर्ति फिरदौस पूनीवाला की पीठ ने सुनवाई के दौरान कहा कि रमजान इस्लाम के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है, लेकिन इसका अर्थ यह नहीं कि कोई भी व्यक्ति किसी भी स्थान—विशेषकर हवाई अड्डे जैसे संवेदनशील क्षेत्र—में नमाज अदा करने का अधिकार मांग सके। अदालत ने कहा कि जब राष्ट्रीय सुरक्षा का प्रश्न हो, तब सावधानी से समझौता नहीं किया जा सकता।
दरअसल, यह मामला टैक्सी-रिक्शा ओला-उबर मेन्स यूनियन की याचिका से जुड़ा था। याचिका में कहा गया था कि छत्रपति शिवाजी महाराज अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डा के पास एक अस्थायी शेड था, जहां चालक नमाज पढ़ते थे, जिसे पिछले वर्ष प्रशासन ने हटा दिया। याचिकाकर्ताओं ने अदालत से अनुरोध किया था कि या तो उसी स्थान पर नमाज पढ़ने की अनुमति दी जाए या फिर आसपास कोई वैकल्पिक जगह उपलब्ध कराई जाए।
मामले की पिछली सुनवाई में अदालत ने पुलिस और हवाई अड्डा प्राधिकरण को यह जांचने का निर्देश दिया था कि क्या किसी अन्य स्थान पर व्यवस्था संभव है। अधिकारियों ने गुरुवार को अपनी रिपोर्ट में बताया कि सात संभावित स्थलों का सर्वे किया गया, लेकिन भीड़भाड़, सुरक्षा चिंताओं और हवाई अड्डा विकास योजना से जुड़े कारणों के चलते कोई भी स्थान उपयुक्त नहीं पाया गया।
रिपोर्ट का अवलोकन करने के बाद अदालत ने कहा कि चूंकि मामला हवाई अड्डे की सुरक्षा से जुड़ा है, इसलिए याचिकाकर्ताओं को राहत नहीं दी जा सकती। अदालत ने यह भी कहा कि संबंधित क्षेत्र से लगभग एक किलोमीटर के दायरे में एक मदरसा मौजूद है, जहां नमाज अदा की जा सकती है।
पीठ ने दो टूक कहा कि हवाई अड्डे जैसे अति-संवेदनशील क्षेत्र के आसपास सुरक्षा के साथ किसी प्रकार का समझौता नहीं किया जा सकता और याचिकाकर्ताओं को नमाज के लिए कोई अन्य स्थान तलाशना होगा।













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