राष्ट्रपति चुनाव के लिए विपक्षी पार्टियों ने मिलकर पूर्व केंद्रीय मंत्री यशवंत सिन्हा को अपना उम्मीदवार चुना है। 18 जुलाई को राष्ट्रपति चुनाव होने हैं। इस मुद्दे को लेकर दूसरी बैठक के बाद सिन्हा के नाम पर मुहर लगाई गई है। इससे पहले 15 जून को पहले चरण की बैठक हुई थी जिसमें कोई सहमति नहीं बन पाई थी।
भाजपा नेता हैं बेटे जयंत सिन्हा
यशवंत सिन्हा लंबे समय से राजनिति से जुड़े हैं। वहीं उनके बेटे जयंत सिन्हा भाजपा के नेता हैं। वह भारतीय प्रशासनिक सेवा के अधिकारी रहे हैं। 24 साल तक उन्होंने इस रूप में सेवा दी। वह देश के वित्त मंत्री और विदेश मंत्री भी रह चुके हैं। हालांकि बाद में उन्होंने भाजपा से इस्तीफा दे दिया। पश्चिम बंगाल में चुनाव से पहले वह टीएमसी में शामिल हो गए थे। राष्ट्रपति उम्मीदवार बनाए जाने से पहले उन्होंने पार्टी छोड़ दी।
आईएएस के रूप में दीं सेवाएं
यशवंत सिन्हा का जन्म 6 नवंबर 1937 को पटना में हुआ था। 1960 में वह भारतीय प्रशासनिक सेवा में शामिल हुए। इस दौरान वह कई महत्वपूर्ण पदों पर रहे। एसडीएम और डीएम के रूप में सेवा देने के बाद वाणिज्य मंत्रालय में उप सचिव का भी जिम्मा संभाला। जर्मनी के भारतीय दूतावास में भी उन्होंने कार्य किया। वह फ्रैंकफर्ट में भारत के कौंसुल जनरल रहे।
वित्त मंत्री और विदेश मंत्री का भी पदभार संभाला
1984 में उन्होंने भारतीय प्रशासनिक सेवा से इस्तीफा दे दिया और राजनीति में आ गए। वह जनता पार्टी के सदस्य थे। इसके बाद 1992 में भारतीय जनता पार्टी में शामिल हो गए। 2018 तक वह भारतीय जनता पार्टी में रहे। इसके बाद टीएमसी में शामिल हो गए और राष्ट्रीय उपाध्यक्ष बनाए गए। 84 साल के राजनेता अटल बिहारी वाजपेयी की सरकार में वित्त मंत्री और विदेश मंत्री के पद पर रहे।
वर्तमान में सिन्हा को नरेंद्र मोदी सरकार का आलोचक माना जाता है। उन्होंने मोदी सरकार की नीतियों से असहमत होकर ही भाजपा छोड़ी थी और फिर टीएमसी में शामिल हो गए थे। राफेल केस में मोदी सरकार को क्लीन चिट मिलने पर भी प्रशांत भूषण, अरुण शौरी और यशवंत सिन्हा ने कोर्ट में रिव्यू पिटिशन डाली थी।













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