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Home ओपिनियन

जिसके नाम पर चला किसान आंदोलन, आखिर क्या हुआ कि अलग-थलग हो गए राकेश टिकैत

ON THE DOT TEAM by ON THE DOT TEAM
May 16, 2022
in ओपिनियन
Reading Time: 1 min read
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राकेश टिकैत को अनजान नंबर से मिली हत्या की धमकी, पुलिस ने शुरू की जांच

File Photo

कृषि कानूनों के विरोध में एक साल से ज्यादा चले किसान आंदोलन में अगर कोई चेहरा सबसे ज्यादा पहचाना गया तो वह है राकेश टिकैत का। किसानों की बातों को सरकार और मीडिया के सामने रखने में राकेश टिकैत हमेशा आगे रहते थे। टीवी चैनलों की डिबेट में भी किसानों की तरफ से सबसे बड़े चेहरे के रूप में राकेश टिकैत ही शामिल होते थे। ऐसा लगता था कि अगर राकेश टिकैत न होते तो आंदोलन कब का धराशायी हो गया होगा।

कृषि कानूनों की वापसी के साथ ही एक तरह से किसानों की जीत हुई। फिर आखिर क्या हुआ कि राकेश टिकैत 6 महीने के अंदर ही संगठन में अलग-थलग पड़ गए। क्या मोदी सरकार ने किसानों की मांगें मानकर राकेश टिकैत का करियर खत्म कर दिया? ऐसे कई सवाल उठ रहे हैं। वहीं भारतीय किसान यूनियन के नेताओं ने भी टिकैत भाइयों पर राजनीतिक दलों की कठपुतली बनने के आरोप लगाए हैं।

क्यों दो फाड़ हो गई भाकियू?
चौधरी महेंद्र सिंह टिकैत की पुण्यतिथि के मौके पर संगठन दो फाड़ हो गया। असंतुष्ट गुट ने भारतीय किसान यूनियन (अराजनीतिक) के नाम से नया संगठन बना लिया और भारतीय किसान यूनियन के उपाध्यक्ष रहे राजेश सिंह को इस संगठन का अध्यक्ष बना दिया गया। राकेश टिकैत और नरेश टिकैत इस कार्यक्रम में शामिल तक नहीं हुए। इस नए संगठन के सदस्यों का आरोप है कि राकेश टिकैत अपने लिए राजनीतिक जमीन तैयार कर रहे हैं और किसानों से उनका सरोकार नहीं रह गया है।

राकेश टिकैत को थी विद्रोह की भनक
संगठन के अंदर हो रही हलचल की जानकारी राकेश टिकैत को थी। वह चौ. महेंद्र सिंह टिकैत की पुण्यतिथि पर होने वाले कार्यक्र से पहले ही लखनऊ पहुंच गए थे और असंतुष्ट धड़े के प्रमुख नेता हरिनाम सिंह के घर पर ठहरे थे। उन्होंने नेताओं को मनाने का प्रयास भी किया लेकिन कुछ काम नहीं आया।

सरकार के खिलाफ मोर्चा खोलना और चुनावी राज्यों का दौरा पड़ा महंगा
आंदोलन के दौरान राकेश टिकैत उन राज्यों में भी जाते थे जहां चुनाव थे। वह भाजपा के खिलाफ जमकर जहर उगलते थे। केंद्र की नीतियों को बुरा बताते थे। पश्चिम बंगाल में जब ममता बनर्जी की टीएमसी जीती तो राकेश टिकैत को भी इसका श्रेय दिया जाने लगा। हालांकि उत्तर प्रदेश में तमाम सभाएं करने के बावजूद भाजपा की जीत हुई। अब नाराज खेमे का आरोप है कि वह विपक्षी दलों के साथ राजनीतिक दावं खेल रहे थे। राजेशि सिंह मलिक ने कहा कि केंद्र और राज्य सरकारों की मदद के बिना किसानों का भला नहीं हो सकता है।

आंदोलन के दौरान उपद्रव!
किसान आंदोलन के दौरान कई बार हिंसा भी हुई। 26 जनवरी 2021 को किसानों की रैली में बवाल हुआ। इसके बाद लालकिले पर धार्मिक झंडा फहराया गया। उस वक्त आंदोलन टूटने ही वाला था लेकिन राकेश टिकैत के आंसुओं ने किसानों को वापस आने पर मजबूर कर दिया। राकेश टिकैत ने भाजपा सरकार पर आरोप लगाया कि वह किसानों को मारने की साजिश कर रही है। हालांकि आज हिंसा की घटनाओं को लेकर भारतीय किसान यूनियन में ही लोग विद्रोह पर उतर आए। उन्होंने हिंसा को गलत ठहराया। कई लोग इसका जिम्मेदार राकेश टिकैत को बता रहे हैं।

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