डेस्क : मुकेश अंबानी की कंपनी रिलायंस जियो के बहुप्रतीक्षित आईपीओ को लेकर एक अहम बदलाव सामने आया है। रिपोर्ट्स के अनुसार, अब इस आईपीओ में ऑफर फॉर सेल (OFS) का हिस्सा नहीं होगा और इसे पूरी तरह फ्रेश इश्यू के रूप में लाया जाएगा।
पहले की योजना में यह माना जा रहा था कि मौजूदा निवेशक अपनी कुछ हिस्सेदारी बेचकर बाजार से बाहर निकल सकते हैं, लेकिन नए बदलाव के बाद ऐसा नहीं होगा। अब आईपीओ से जुटाई गई पूरी राशि कंपनी के पास जाएगी।
क्या है नया बदलाव?
रिपोर्ट के मुताबिक, रिलायंस और जियो के कई बड़े निवेशकों के बीच पिछले कुछ समय से मूल्यांकन और शेयर संरचना को लेकर बातचीत चल रही थी। इसी वजह से संरचना में यह बदलाव किया गया है।
अब इस नए मॉडल में—
- सभी शेयर नए जारी होंगे
- निवेशकों को अपने हिस्से बेचने का विकल्प नहीं मिलेगा
- जुटाई गई पूंजी सीधे जियो के विकास में इस्तेमाल होगी
क्यों लिया गया यह फैसला?
जानकारों के अनुसार, यह कदम इसलिए उठाया गया है ताकि—
- कंपनी की दीर्घकालिक ग्रोथ को समर्थन मिले
- बाजार में लिस्टिंग के बाद दबाव कम रहे
- रिटेल निवेशकों के भरोसे को मजबूत किया जा सके
संभावित असर
विशेषज्ञ मानते हैं कि इस बदलाव से जियो का आईपीओ और अधिक मजबूत और निवेशक-हितैषी बन सकता है। साथ ही, इससे कंपनी को विस्तार, तकनीक और कर्ज घटाने जैसे कार्यों के लिए बड़ी पूंजी मिलेगी।
रिपोर्ट के अनुसार, यह आईपीओ भारत के सबसे बड़े आईपीओ में से एक हो सकता है, और इसके लिए तैयारियां अंतिम चरण में हैं।













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