डेस्क: पश्चिम बंगाल की मतदाता सूची से 91 लाख नाम हटाए जाने के बाद राजनीतिक माहौल गरम हो गया है। भाजपा सांसद और अभिनेत्री कंगना रनौत ने इस प्रक्रिया की सराहना करते हुए कहा कि यह पारदर्शी और खुली प्रक्रिया है और अवैध घुसपैठियों को हटाने का प्रयास है। उन्होंने सवाल उठाया कि अगर कार्रवाई सही है, तो मुख्यमंत्री ममता बनर्जी को इतनी तकलीफ़ क्यों हो रही है।
कंगना ने कहा, “लाखों नाम हटाए गए हैं, जिससे पता चलता है कि पहले सरकारें कैसे बनती थीं। बंगाल की जनता इसे देख रही है और भाजपा को समर्थन दे रही है।”
इसके जवाब में ममता बनर्जी ने SIR को भेदभावपूर्ण और राजनीतिक रूप से लक्षित कार्रवाई करार दिया। उन्होंने चकदाहा में रैली में कहा कि मतुआ, राजबंशी और अल्पसंख्यक समुदायों के मतदाताओं के नाम हटाए गए हैं। बनर्जी ने दावा किया कि भवानीपुर सीट पर अकेले 40,000 नाम हटाए गए और मुस्लिम बहुल जिलों में भी कई नाम सूची से बाहर किए गए।
ममता बनर्जी ने केंद्र और भाजपा पर आरोप लगाया कि SIR का उपयोग 23 और 29 अप्रैल के मतदान से पहले राजनीतिक मानचित्र बदलने के लिए किया जा रहा है। उन्होंने इसे लोकतंत्र और सामाजिक सम्मान की लड़ाई बताया।
निर्वाचन आयोग के आंकड़ों के अनुसार, कुल 7.66 करोड़ मतदाताओं में से 90.83 लाख से अधिक नाम हटाए गए। इस कदम ने 2026 के विधानसभा चुनावों में राजनीतिक ध्रुवीकरण को और तेज़ कर दिया है।













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