डेस्क:यूपी के कानपुर में नशीली और एक्सपायरी दवाओं की बिक्री की सूचना पर मंगलवार को खाद्य सुरक्षा एवं औषधि प्रशासन आयुक्त डॉ. रोशन जैकब ने चार टीमों के साथ बिरहाना रोड की दुकान और कोपरगंज के गोदाम में छापेमारी की। अग्रवाल ब्रदर्स नाम से संचालित पिता-पुत्र के इन प्रतिष्ठानों से करोड़ों रुपये के कोडीन युक्त कफ सिरप, ट्रामाडोल टैबलेट्स और एक्सपायरी दवाएं बरामद हुई हैं। उधर, पिता-पुत्र मौके से फरार हो गए। आयुक्त डॉ. रोशन जैकब टीम के साथ सबसे पहले थोक दवा बाजार बिरहाना रोड की अग्रवाल ब्रदर्स फर्म के विनोद अग्रवाल और उनके बेटे शिवम अग्रवाल की दुकान पर पहुंचीं।
इसके बाद कोपरगंज गोदाम गईं। यहां बड़े पैमाने पर प्रतिबंधित सिरप, दवाएं बरामद हुईं। यह लोग बिक्री एवं वितरण का कोई अभिलेख उपलब्ध नहीं करा पाए। टीम ने शिवम अग्रवाल की दूसरी फर्म मेडिसिना, विक्की लालवानी की एसजीपीएस, अनमोल गुप्ता की वेदांश फार्मेसी में भी छापेमारी की। एसजीपीएस फर्म क्रय-विक्रय की जानकारी नहीं दे सकी। रोशन जैकब ने बताया कि अग्रवाल ब्रदर्स, मेडिसिना और एसजीपीएस फर्म पर रिपोर्ट दर्ज कराने के निर्देश दिए गए हैं।
सालों से दवा का अवैध कारोबार शहर के अफसरों को भनक नहीं
खाद्य आयुक्त के शहर में छापेमारी से हड़कंप मच गया। सालों से अग्रवाल ब्रदर्स नशे का कारोबार कर रहे थे। इसके बावजूद शहर के अफसरों को भनक तक नहीं लगी। इसलिए सर्किट हाउस आने के बाद शहर की टीम को आयुक्त ने जानकारी दी। इससे उनके भी हाथ पांव फूल गए। हिमाचल की लेबोरेट कंपनी से अग्रवाल ब्रदर्स ने नशे के सिरप को खरीदा था। वह लेबोरेट कंपनी का बड़ा डीलर है। उनके खिलाफ लखनऊ से भी काफी सबूत मिले हैं। इसके लिए आयुक्त को खुद आकर छापेमारी करनी पड़ी। जिसमें बड़े पैमाने पर गोरखधंधे का खुलासा हुआ है। इससे शहर में चल रही कार्रवाई पर बड़ा सवालिया निशान खड़ा हो रहा है। आखिरकार शहर के अफसर क्यों नहीं नशे के सौदागरों को पकड़ पा रहे थे।
तीन-तीन फर्म के जरिए नशे का कारोबार
अग्रवाल ब्रदर्स का मालिक विनोद अग्रवाल नशे के कारोबार का बड़ा खिलाड़ी है। पहले वह अकेले काम करता था। फिर उसने अपने बेटे शिवम अग्रवाल को भी साझेदार बनाया। इतना ही नहीं बेटे शिवम की मेडिसिना एक अलग फर्म भी बनवा दी। जिसमें उसका दोस्त अनमोल गुप्ता साझेदार भी है। वेदांश फर्म अनमोल गुप्ता की है। तीन फर्मों के जरिए नशे का कारोबार हो रहा था। मौके पर अनमोल ने अफसरों को बताया कि वह सिर्फ एक साल से कारोबार कर रहा है।
पूरे यूपी से लेकर नेपाल तक सप्लाई
अग्रवाल ब्रदर्स ने नशे का कारोबार बड़े पैमाने पर फैला रखा है। हिमाचल से माल मंगाकर गाजियाबाद, लखनऊ से लेकर कोपरगंज के गोदाम में रखता था। लेबोरेट कंपनी से उसने 90 हजार बोतल नशे में प्रयोग होने वाले कप सिरप को मंगाया। फिर उनको यूपी के अलग-अलग जगहों पर अन्य खेप के साथ बेचा है। इसकी पुष्टि हिमाचल से बिक्री करने वाली कंपनी के जरिए ड्रग विभाग को मिली है। नशीले दवाओं की सप्लाई नेपाल तक की जा रही है। अग्रवाल ब्रदर्स 47 जगह पर नशीली दवाओं को सप्लाई कर चुका है।
नारकोटिक्स का लाइसेंस निरस्त
मौके पर टीम को कई ब्रांड की कोडीन सिरप के साथ ही न्यूट्रास्यूटिकल पौष्टिक -औषधीय समेत कई दवाएं एक्सपायर मिली हैं। खाद्य आयुक्त डॉ. रोशन जैकब के मुताबिक अब अग्रवाल ब्रदर्स के सभी लाइसेंस निरस्त होंगे। अभी नारकोटिक्स का लाइसेंस निरस्त किया गया है। अब रिपोर्ट के साथ सभी लाइसेंस को निरस्त किया जाएगा। जिससे अग्रवाल ब्रदर्स के पूरे गिरोह का पर्दाफॉश हो सके। फिलहाल पिता-पुत्र फरार हो गए हैं।
जिले के अफसरों की भूमिका संदिग्ध
मौके पर जांच पड़ताल करने आई लखनऊ की टीम को कानपुर के ड्रग विभाग की भूमिका ठीक नहीं मिली है। उनकी भूमिका संदिग्ध मिली है। मौके पर जिस तरह से गोदाम में अव्यवस्था फैली थी उसे देखकर उसे पहले ही सील होना चाहिए था। फिर भी शहर के अफसरों ने कार्रवाई नहीं की। लाइसेंस निरस्त करने के नाम पर सिर्फ नारकोटिक्स का रद्द किया गया। शहर के अफसरों पर भी अब कार्रवाई की तलवार लटकने लगी है।
खाद्य आयुक्त, डॉ. रोशन जैकब ने कहा कि कानपुर में बड़े पैमाने पर नशे के सिरप और दवाओं का कारोबार हो रहा है। इसके सबूत हिमाचल, गाजियाबाद व लखनऊ से मिले थे। इसके बावजूद कोई बड़ी कार्रवाई नहीं हुई। इसलिए लखनऊ की चार टीमें लेकर छापेमारी की। बड़े पैमाने पर कोडीन युक्त सिरप, ट्रामाडोल टैबलेट्स व एक्सपायर दवा बरामद हुई है। शहर के अफसरों की भूमिका संदिग्ध है। जांच के बाद कार्रवाई होगी।













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