डेस्क:कर्नाटक के सहकारिता मंत्री के. राजन्ना को इस्तीफा देने के लिए कहा गया है। उन्हें सीएम सिद्धारमैया के करीबी नेताओं में शुमार किया जाता है। ऐसे में उनसे इस्तीफा लेना मायने रखता है और इसकी प्रदेश की राजनीति में काफी चर्चा हो रही है। मुख्यमंत्री कार्यालय के सूत्रों ने सोमवार को यह जानकारी दी। इस्तीफे से पहले मंत्री राजन्ना ने विधानसभा में सीएम सिद्धारमैया से मुलाकात भी की। विधानसभा सत्र के दौरान भी यह मामला उठा और भाजपा ने इस पर जवाब मांगा है। पार्टी ने कहा कि आखिर अचानक मंत्री का इस्तीफा क्यों लिया गया, सरकार को इसके बारे में जानकारी देनी चाहिए।
जानकारी मिली है कि के. राजन्ना को वोटर लिस्ट वाले मामले में राहुल गांधी से अलग राय रखने की कीमत चुकानी पड़ी है। राहुल गांधी ने पिछले सप्ताह कर्नाटक का उदाहरण देते हुए आरोप लगाया था कि एक लाख वोटों की चोरी हुई है। इस पर सवाल उठाते हुए के. राजन्ना ने कहा था कि यदि कर्नाटक में ऐसा हुआ है तो फिर सरकार को भी अपनी जिम्मेदारी लेनी चाहिए। उन्होंने कहा था कि कर्नाटक में वोटर लिस्ट रिवीजन तो कांग्रेस की सरकार के दौर में हुआ था। ऐसे में यह कांग्रेस सरकार की भी जिम्मेदारी थी कि वह वोटर लिस्ट को तैयार करने की प्रक्रिया पर नजर रखती। यदि तभी सवाल उठाए जाते तो यह समस्या ही नहीं होती।
राजन्ना ने क्या कहा था, जिसकी चुकानी पड़ गई कीमत
उनके इस बयान को पार्टी की रणनीति के विपरीत माना गया। डीके शिवकुमार ने खेमे ने राजन्ना के बयान पर सवाल उठाया था और अंत में हाईकमान ने भी सिद्धारमैया से ऐक्शन लेने को कहा। माना जा रहा है कि इसी कारण से यह ऐक्शन हुआ है और राजन्ना को पद ही छोड़ना पड़ गया। राजन्ना ने कहा था, ‘यह याद रखना चाहिए कि कर्नाटक में वोटर लिस्ट में संशोधन हमारी सरकार के दौर में ही हुआ। तब हमारी पार्टी ने आंखें क्यों बंद कर ली थी। वोटर लिस्ट में गड़बड़ी हुई है, लेकिन यह और चिंता की बात है कि यह सब हमारी नाक के नीचे हुआ।’ उन्होंने कहा कि इस मामले में कांग्रेस समय रहते ऐतराज नहीं जता पाई।
दो महीने से कह थे अगस्त क्रांति की बात, खुद का ही छिन गया पद
माना जा रहा है कि उनकी यह राय ही भारी पड़ गई। उन्होंने कहा था कि हमारी जिम्मेदारी थी, लेकिन तब हम चुप रहे और अब बोल रहे हैं। के. राजन्ना बीते दो महीनों से चर्चा में बने हुए थे। उन्हें सिद्धारमैया का करीबी माना जाता है, लेकिन वह बीते दो महीनों से लगातार कह रहे थे कि अगस्त क्रांति होने वाली है और सरकार में बड़े बदलाव होंगे। इससे कयास चल रहे थे कि सरकार में जरूर कुछ बदलाव हो सकते हैं, लेकिन किसी को अनुमान भी नहीं था कि उनका ही इस्तीफा होने वाला है।













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