नई दिल्ली: भारत, ऑस्ट्रेलिया, जापान और अमेरिका के समूह क्वाड (Quad) ने मंगलवार को क्वाड क्रिटिकल मिनरल्स इनिशिएटिव फ्रेमवर्क का अनावरण किया। इसके तहत हिंद-प्रशांत क्षेत्र में महत्वपूर्ण खनिजों (क्रिटिकल मिनरल्स) की सुरक्षित और लचीली आपूर्ति शृंखला विकसित करने के लिए सरकारी तथा निजी क्षेत्र के सहयोग से 20 अरब अमेरिकी डॉलर तक की वित्तीय सहायता जुटाने का लक्ष्य रखा गया है।
यह घोषणा क्वाड विदेश मंत्रियों की बैठक के बाद की गई, जिसमें सदस्य देशों ने उन्नत प्रौद्योगिकी, औद्योगिक विकास, आर्थिक वृद्धि और राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए आवश्यक क्रिटिकल मिनरल्स की आपूर्ति शृंखलाओं को मजबूत बनाने पर सहमति व्यक्त की।
भारत के Ministry of External Affairs द्वारा जारी बयान के अनुसार, इस पहल का उद्देश्य आर्थिक नीतिगत साधनों और समन्वित निवेश के माध्यम से विविधतापूर्ण, पारदर्शी और विश्वसनीय क्रिटिकल मिनरल्स बाजारों के विकास को गति देना है। इससे क्षेत्रीय आर्थिक विकास और सुरक्षा के लिए आवश्यक खनिजों की स्थिर उपलब्धता सुनिश्चित करने में मदद मिलेगी।
सहयोग के तीन प्रमुख क्षेत्र
फ्रेमवर्क के अंतर्गत सहयोग को तीन मुख्य क्षेत्रों में विभाजित किया गया है—
- निवेश एवं परियोजना विकास
- नियामक समन्वय (रेगुलेटरी एलाइनमेंट)
- क्रिटिकल मिनरल्स का पुनर्चक्रण एवं पुनर्प्राप्ति
क्वाड देशों ने खनन, प्रसंस्करण, परिशोधन और पुनर्चक्रण से जुड़े कार्यों को बढ़ावा देने के लिए नई और मौजूदा पहलों के माध्यम से सरकारी तथा निजी क्षेत्र से 20 अरब डॉलर तक की सहायता जुटाने का इरादा जताया है।
सदस्य देश ऐसी रणनीतिक परियोजनाओं की पहचान करेंगे जो आपूर्ति शृंखला की कमियों को दूर कर सकें। साथ ही, निजी निवेश को आकर्षित करने और क्षेत्रीय स्तर पर क्रिटिकल मिनरल्स आपूर्ति शृंखलाओं को मजबूत बनाने के लिए नए वित्तीय तंत्रों की संभावनाओं पर भी विचार किया जाएगा।
नियामक प्रक्रियाओं को सरल बनाने पर जोर
क्वाड देशों ने अपने-अपने घरेलू कानूनों और नीतियों के अनुरूप क्रिटिकल मिनरल्स विकास के लिए बेहतर नियामक वातावरण तैयार करने पर भी सहमति व्यक्त की है।
इसके तहत सदस्य देश अनुमति, लाइसेंसिंग और नियामक प्रक्रियाओं से जुड़े श्रेष्ठ अनुभवों और तकनीकी उपायों का आदान-प्रदान करेंगे। उद्देश्य परियोजनाओं की मंजूरी की समय-सीमा को कम करना और प्रक्रियाओं को अधिक प्रभावी बनाना है।
इसके अतिरिक्त, भूवैज्ञानिक मानचित्रण, संसाधन मूल्यांकन, तकनीकी विकास और क्षमता निर्माण के क्षेत्रों में भी सहयोग को बढ़ावा दिया जाएगा।
क्वाड देशों ने यह भी कहा है कि वे गैर-बाजार आधारित नीतियों और अनुचित व्यापारिक प्रथाओं से निपटने के लिए समन्वित उपायों की व्यवहार्यता का अध्ययन करेंगे। इसमें उच्च मानकों वाले बाज़ार तंत्र और पारदर्शी मूल्य निर्धारण प्रणालियों पर भी विचार किया जा सकता है।
ई-कचरे से खनिजों की पुनर्प्राप्ति पर विशेष ध्यान
इस पहल का एक महत्वपूर्ण पक्ष इलेक्ट्रॉनिक कचरे (ई-वेस्ट) और अन्य स्क्रैप सामग्री से मूल्यवान खनिजों की पुनर्प्राप्ति और पुनर्चक्रण को बढ़ावा देना है।
क्वाड सदस्य देशों का लक्ष्य पुनर्चक्रण तकनीकों, संग्रहण नेटवर्क और प्रसंस्करण अवसंरचना में निवेश को प्रोत्साहित करना है, ताकि महत्वपूर्ण खनिजों की पुनर्प्राप्ति और पुन: उपयोग को बढ़ाया जा सके। इसके लिए निजी क्षेत्र के साथ साझेदारी को भी बढ़ावा दिया जाएगा।
सदस्य देश ई-कचरे और स्क्रैप सामग्री से खनिजों की पुनर्प्राप्ति से संबंधित नवाचारों को बढ़ावा देंगे तथा घरेलू कानूनों और अंतरराष्ट्रीय दायित्वों के अनुरूप पुनर्चक्रण योग्य अपशिष्ट के आयात-निर्यात प्रक्रियाओं को सरल बनाने की संभावनाओं का भी अध्ययन करेंगे।
रणनीतिक महत्व
विशेषज्ञों के अनुसार, क्वाड क्रिटिकल मिनरल्स इनिशिएटिव हिंद-प्रशांत क्षेत्र में महत्वपूर्ण खनिजों की आपूर्ति शृंखलाओं को अधिक सुरक्षित, विविधतापूर्ण और टिकाऊ बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। ये खनिज इलेक्ट्रिक वाहनों, स्वच्छ ऊर्जा प्रौद्योगिकियों, सेमीकंडक्टर निर्माण, रक्षा उद्योग और अन्य उभरती प्रौद्योगिकियों के लिए अत्यंत आवश्यक हैं।
सार्वजनिक और निजी निवेश, तकनीकी सहयोग तथा नीतिगत समन्वय के माध्यम से क्वाड देश भविष्य की औद्योगिक और तकनीकी आवश्यकताओं को पूरा करने के लिए एक मजबूत एवं विश्वसनीय क्रिटिकल मिनरल्स पारिस्थितिकी तंत्र विकसित करने का प्रयास कर रहे हैं।













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