नई दिल्ली : देश की संसद व्यवस्था में बड़ा बदलाव होने जा रहा है। महिला आरक्षण कानून के लागू होने के बाद लोकसभा और विधानसभाओं की संरचना में महत्वपूर्ण विस्तार की संभावना जताई जा रही है। प्रस्तावित व्यवस्था के अनुसार लोकसभा की कुल सीटें 543 से बढ़कर लगभग 850 तक पहुंच सकती हैं।
यह बदलाव महिला आरक्षण को प्रभावी ढंग से लागू करने के लिए किया जा रहा है, ताकि प्रत्येक क्षेत्र में महिलाओं को समानुपातिक प्रतिनिधित्व मिल सके। योजना के तहत लोकसभा और राज्य विधानसभाओं में कुल सीटों का लगभग एक-तिहाई हिस्सा महिलाओं के लिए आरक्षित किया जाएगा।
सरकारी सूत्रों के अनुसार, यह विस्तार परिसीमन (डिलिमिटेशन) और जनगणना के बाद लागू किया जाएगा। इसके बाद निर्वाचन क्षेत्रों का पुनर्गठन होगा, जिससे लोकसभा की सीटों की संख्या बढ़ सकती है।
महिला आरक्षण विधेयक के तहत यह भी प्रावधान है कि आरक्षित सीटें समय-समय पर रोटेशन के आधार पर बदली जाएंगी, ताकि सभी क्षेत्रों को प्रतिनिधित्व का अवसर मिल सके। इसके अलावा, अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति वर्ग की महिलाओं के लिए भी आरक्षण के भीतर उप-आरक्षण का प्रावधान किया गया है।
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि यह व्यवस्था पूरी तरह लागू होती है, तो भारतीय लोकतंत्र में महिलाओं की भागीदारी ऐतिहासिक रूप से बढ़ जाएगी और राजनीतिक संरचना अधिक समावेशी बन सकती है।
सरकार का कहना है कि यह कदम “नारी शक्ति वंदन अधिनियम” के तहत महिला सशक्तिकरण की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल है, जिसका उद्देश्य नीति-निर्माण में महिलाओं की भागीदारी को बढ़ाना है।













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