नई दिल्ली : देश में मानसून की धीमी रफ्तार और कम बारिश का असर अब कृषि क्षेत्र पर दिखाई देने लगा है। खरीफ फसलों की बुवाई प्रभावित होने से चावल, दालों और खाद्य तेलों की कीमतों में बढ़ोतरी की आशंका जताई जा रही है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि बारिश की स्थिति में जल्द सुधार नहीं हुआ तो आने वाले समय में खाद्य महंगाई और बढ़ सकती है।
कम बारिश के कारण कई राज्यों में धान, दाल और तिलहन जैसी प्रमुख खरीफ फसलों की बुवाई पिछड़ गई है। कृषि विशेषज्ञों के अनुसार, इन फसलों का उत्पादन प्रभावित होने की स्थिति में बाजार में आपूर्ति कम हो सकती है, जिसका सीधा असर कीमतों पर पड़ सकता है।
चावल, अरहर, उड़द, मूंग सहित अन्य दालों और खाद्य तेलों की कीमतों पर पहले से दबाव बना हुआ है। मानसून की कमी ने इस चिंता को और बढ़ा दिया है कि यदि फसल उत्पादन में गिरावट आती है तो आम उपभोक्ताओं के घरेलू बजट पर अतिरिक्त बोझ पड़ सकता है।
व्यापारियों और बाजार विशेषज्ञों के अनुसार, कम उत्पादन की आशंका के चलते खाद्य वस्तुओं की कीमतों में उतार-चढ़ाव देखने को मिल सकता है। दालों और तेलों जैसी रोजमर्रा की जरूरत वाली वस्तुओं की कीमतें बढ़ने से महंगाई दर पर भी असर पड़ने की संभावना है।
हालांकि, मौसम विभाग और कृषि विभाग की नजर मानसून की प्रगति पर बनी हुई है। विशेषज्ञों का कहना है कि यदि आने वाले दिनों में अच्छी बारिश होती है तो फसलों की स्थिति में सुधार हो सकता है और कीमतों पर बढ़ता दबाव कम हो सकता है।













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