नई दिल्ली : देश में खुदरा महंगाई दर मार्च 2026 में बढ़कर 3.4 प्रतिशत दर्ज की गई है, जो फरवरी 2026 में 3.21 प्रतिशत थी। हालांकि यह दर अभी भी भारतीय रिजर्व बैंक के निर्धारित 4 प्रतिशत के लक्ष्य के भीतर बनी हुई है, लेकिन लगातार बढ़ती खाद्य कीमतों ने चिंता बढ़ा दी है।
जारी सरकारी आंकड़ों के अनुसार, महंगाई में यह वृद्धि मुख्य रूप से खाद्य पदार्थों की कीमतों में उछाल के कारण हुई है। सब्जियों, खाद्य तेल और अन्य आवश्यक वस्तुओं के दाम बढ़ने से उपभोक्ताओं पर सीधा असर पड़ा है।
खाद्य महंगाई दर मार्च में बढ़कर करीब 3.87 प्रतिशत तक पहुंच गई, जिसने कुल महंगाई दर को ऊपर खींचने में अहम भूमिका निभाई। इसके अलावा ईंधन और गैस की कीमतों में उतार-चढ़ाव ने भी घरेलू बजट पर दबाव बढ़ाया है।
ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों के आंकड़ों पर नजर डालें तो ग्रामीण महंगाई 3.63 प्रतिशत रही, जबकि शहरी महंगाई 3.11 प्रतिशत दर्ज की गई। इससे स्पष्ट है कि गांवों में महंगाई का असर अपेक्षाकृत अधिक महसूस किया जा रहा है।
विशेषज्ञों का मानना है कि वैश्विक परिस्थितियों, विशेषकर कच्चे तेल की कीमतों और आपूर्ति श्रृंखला में बाधाओं के कारण आने वाले महीनों में महंगाई पर दबाव बना रह सकता है। हालांकि, फिलहाल यह आरबीआई के लक्ष्य के भीतर है, इसलिए मौद्रिक नीति में तत्काल बड़े बदलाव की संभावना कम मानी जा रही है।













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