बेंगलुरू : कर्नाटक के मुख्यमंत्री सिद्धारमैया ने केंद्र सरकार द्वारा जी राम जी परियोजना लागू किए जाने को लेकर तीखा विरोध दर्ज कराया है। उन्होंने आरोप लगाया कि इस फैसले के जरिए केंद्र ने महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी अधिनियम (मनरेगा) को समाप्त कर महात्मा गांधी की “दूसरी हत्या” की है। सिद्धारमैया के इस बयान के बाद राजनीतिक हलकों में विवाद तेज हो गया है।
शनिवार को बेंगलुरू में एक जनसभा को संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि महात्मा गांधी की पहली हत्या गोडसे ने की थी, जबकि मौजूदा केंद्र सरकार उनकी विचारधारा पर हमला कर रही है। उन्होंने कहा कि केंद्र को इतना प्रतिशोधी रवैया नहीं अपनाना चाहिए।
सिद्धारमैया ने कहा कि मनरेगा की शुरुआत पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह के कार्यकाल में संविधान के निर्देशक सिद्धांतों के तहत की गई थी। इस योजना का उद्देश्य ग्रामीण गरीबों, छोटे किसानों और मजदूरों को रोजगार, सम्मान और सामाजिक सुरक्षा प्रदान करना था। उनके अनुसार, काम करने का अधिकार, शिक्षा का अधिकार जैसे कई प्रावधान उसी दौर में लागू किए गए, जिनसे आम जनता को सीधा लाभ मिला।
मुख्यमंत्री ने आरोप लगाया कि केंद्र सरकार ने राज्यों से परामर्श किए बिना मनरेगा को हटाकर उसकी जगह ‘विकसित भारत ग्राम योजना’ लागू कर दी है। उन्होंने इसे संघीय ढांचे के खिलाफ बताते हुए कहा कि यह निर्णय केंद्र की तानाशाही प्रवृत्ति को दर्शाता है।
सिद्धारमैया का यह भी कहना था कि नया कानून संसद में जल्दबाजी में पारित किया गया। इसे 17 दिसंबर को पेश किया गया और अगले ही दिन बिना पर्याप्त बहस और राज्यों से संवाद के पारित कर दिया गया। उन्होंने आरोप लगाया कि इससे ग्राम सभाओं और ग्राम पंचायतों की वैधानिक शक्तियां कमजोर होंगी और सत्ता का केंद्रीकरण नई दिल्ली में होगा।
गौरतलब है कि केंद्र सरकार के इस फैसले के विरोध में कांग्रेस पार्टी देशव्यापी आंदोलन की तैयारी कर रही है, जिसे लेकर आने वाले दिनों में राजनीतिक माहौल और गर्माने के संकेत हैं।













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