डेस्क: मराठा समुदाय को ओबीसी कोटे में आरक्षण देने की मांग को लेकर मनोज जरांगे पाटील ने हाल ही में मुंबई के आजाद मैदान में पांच दिन तक अनशन किया था। इसके बाद फडणवीस सरकार ने मराठा आरक्षण लागू करने के लिए हैदराबाद गजट लागू करने की घोषणा की। इससे मराठा समुदाय को कुनबी श्रेणी के तहत ओबीसी आरक्षण का लाभ मिल सकेगा। हालांकि, इस फैसले से ओबीसी समुदाय नाराज है। इस मुद्दे पर एनसीपी कोटे से मंत्री छगन भुजबल ने मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस से मुलाकात की और उन्हें आठ पन्नों का एक पत्र सौंपा।
जानकारी के मुताबिक, पत्र में कहा गया है कि हैदराबाद गजट को स्वीकार करने का फैसला राज्य मंत्रिमंडल में नहीं लिया गया था और न ही जनता से सुझाव या आपत्तियां मांगी गई थीं। सरकार ने मराठा समुदाय के दबाव में सरकारी प्रस्ताव (जीआर) जारी किया। भुजबल ने सुझाव दिया कि सरकार को या तो जीआर वापस लेना चाहिए या उसमें संशोधन करना चाहिए ताकि ओबीसी समुदाय पर नकारात्मक प्रभाव न पड़े।
8 सितंबर को छगन भुजबल ने कहा था कि उनके सभी संगठन मराठा आरक्षण से संबंधित सरकारी फैसले के खिलाफ एकजुट हैं। उन्होंने कहा कि वे इस फैसले से प्रभावित नहीं होंगे और अगले दो-तीन दिनों में कोर्ट में जाएंगे। भुजबल ने स्पष्ट किया था कि ओबीसी की 374 जातियों में अलग-अलग राय हो सकती है, लेकिन सभी इस बात पर सहमत हैं कि ओबीसी का आरक्षण कम नहीं होना चाहिए। अन्य ओबीसी नेताओं का मानना है कि मराठाओं को कुनबी बनाकर आरक्षण देने से उनके अधिकारों पर असर पड़ेगा। हालांकि, सरकार का दावा है कि उसने सभी समुदायों के हितों को ध्यान में रखते हुए हैदराबाद गजट लागू किया है।
बता दें कि 3 सितंबर को ओबीसी हितों को ध्यान में रखते हुए महाराष्ट्र सरकार ने एक नई उप-समिति का गठन किया था। इस समिति की जिम्मेदारी भाजपा नेता चंद्रशेखर बावनकुले को सौंपी गई है। समिति में कुल 8 सदस्य हैं, जिनमें भाजपा से 4, शिवसेना से 2 और एनसीपी से 2 सदस्य शामिल हैं। एनसीपी के अजित पवार गुट के वरिष्ठ नेता छगन भुजबल भी इस समिति के सदस्य हैं।













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