मुंबई। Lok Sabha Elections 2024: मुंबई का शिवाजी पार्क मैदान एकबार फिर सुर्खियों में हैं। चुनावी मौसम में राज्य की सभी राजनीतिक पार्टियों में इसे बुक कराने की होड़ मची हुई है। सत्तारूढ़ शिव सेना (एकनाथ गुट), बीजेपी और एनसीपी के अलावा उद्धव ठाकरे के नेतृत्व वाली शिव सेना और राज ठाकरे की महाराष्ट्र नव निर्माण सेना ने भी इस मैदान को बुक करने के लिए बीएमसी में आवेदन दिया है।
मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे के नेतृत्व वाली शिवसेना ने पांच चरणों में होने वाले लोकसभा चुनावों के दौरान रैली आयोजित करने के साथ-साथ 12 अक्टूबर को इस पार्क में अपनी दशहरा रैली आयोजित करने के लिए भी आवेदन किया है। एकनाथ शिंदे गुट की शिवसेना ने 2022 में बीकेसी और 2023 में आज़ाद मैदान में दशहरा रैली आयोजित की थी, जब शिवसेना (यूबीटी) को दशहरा रैली के लिए शिवाजी पार्क आवंटित किया गया था।
लोकसभा चुनाव के लिए पांच दलों, शिवसेना, शिव सेना (यूबीटी), बीजेपी, एनसीपी और एमएनएस ने कम से कम एक दर्जन दिनों की बुकिंग के लिए आवेदन बीएमसी को दिए हैं। सीएम शिंदे के शिवसेना 16, 19 और 21 अप्रैल और 3, 5 और 7 मई को मैदान बुक करना चाहती है, तो एनसीपी ने 22, 24 और 27 अप्रैल को मैदान बुक कराने का आवेदन दिया है। सरकार में साझीदार बीजेपी ने 23, 26 और 28 अप्रैल की बुकिंग का आवेदन दिया है।
कांग्रेस, जिसने हाल ही में 17 मार्च को भारत जोड़ो न्याय यात्रा के समापन के अवसर पर शिवाजी पार्क में एक मेगा रैली आयोजित की थी, ने अभी तक नई रैलियां आयोजित करने का कोई आवेदन नहीं दिया है। शरद पवार के नेतृत्व वाली एनसीपी ने भी अभी तक अपना आवेदन नहीं दिया है, जबकि शिव सेना (यूबीटी) और राज ठाकरे की एमएनएस दोनों ने एक ही दिन यानी 17 मई को मैदान की बुकिंग का आवेदन दिया है। यानी एक ही दिन की बुकिंग के लिए दोनों ठाकरे आमने-सामने आ गए हैं।
नगर निगम के अधिकारियों ने कहा कि बीएमसी को विभिन्न दलों से कुल छह आवेदन प्राप्त हुए हैं। TOI से बात करते हुए उन्होंने कहा, “कुछ आवेदनों में कई तारीखों पर शिवाजी पार्क को बुक करने का अनुरोध किया गया है। हमने राज्य शहरी विकास विभाग और चुनाव आयोग को सभी अनुरोध भेज दिए हैं। उनके द्वारा लिए गए निर्णय के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी।”
शिवसेना (यूबीटी) सांसद संजय राउत ने कहा कि देश में लोकतंत्र है और सभी पार्टियां अपनी-अपनी चुनावी रैलियां करने के लिए स्वतंत्र हैं। वे कहीं भी रैली कर सकते हैं, किसी भी मैदान को बुक करने के लिए भी स्वतंत्र हैं। उन्होंने कहा, “हम महाराष्ट्र में 48 सीटों पर लड़ रहे हैं। हमने सबसे पहले शिवाजी पार्क के लिए आवेदन किया है। शिवाजी पार्क में राजनीतिक रैलियां आयोजित करने की हमारी पुरानी परंपरा है। इसलिए जो कोई भी आवेदन करेगा, उसे अनुमति लेनी होगी।”
बता दें कि 2022 और 2023 में शिवाजी पार्क में दशहरा रैली आयोजित करने पर शिवसेना (यूबीटी) और शिवसेना में विवाद हो चुका है। तब दोनों ने इसके लिए आवेदन किया था। 2022 में, बीएमसी ने दोनों पक्षों को इसकी अनुमति देने से इनकार कर दिया था। अंततः बॉम्बे हाई कोर्ट ने बीएमसी के आदेश को रद्द कर दिया और शिव सेना (यूबीटी) को शिवाजी पार्क में अपनी दशहरा रैली आयोजित करने की अनुमति दी थी। हाई कोर्ट ने कहा था कि बीएमसी ने याचिकाकर्ताओं के आवेदन पर निर्णय लेने में अपनी शक्तियों का दुरुपयोग किया है। अदालत ने आगे शिव सेना (यूबीटी) को अपने आदेश के साथ वार्ड अधिकारियों से संपर्क करने और 2016 के सरकारी प्रस्ताव के अनुसार नए सिरे से अनुमति मांगने का निर्देश दिया था।
दरअसल, मुंबई के दादर में स्थित शिवाजी पार्क से भेजा गया राजनीतिक संदेश पूरे महाराष्ट्र में गूंजता है। यह आजादी से पहले के काल से ही राज्यवासियों को संदेश देने और कई आंदलनों की जन्मभूमि और क्रांतिस्थल रहा है। 1925 में निर्मित यह पार्क ब्रिटिश भारत में स्वतंत्रता सेनानियों की सभा का स्थान हुआ करता था। 1947 में आजादी के बाद से, शिवाजी पार्क संयुक्त महाराष्ट्र चलवल (एक समेकित महाराष्ट्र के लिए संघर्ष) का केंद्र बिंदु रहा है जिसके कारण 1960 में वर्तमान महाराष्ट्र राज्य का गठन हुआ।
इस दौरान, प्रसिद्ध लेखक, पत्रकार, नाटककार, कवि और सामाजिक नेता आचार्य प्रह्लाद केशव अत्रे ने इस आंदोलन का नेतृत्व किया। उन्होंने इस मैदान पर लाखों की भीड़ को संबोधित किया, जिससे उन्हें “शिवाजी पार्क के भगवान” की उपाधि मिली। शिवाजी पार्क शिव सेना की राजनीतिक सभाओं का अभिन्न अंग रहा है। यह कई राजनीतिक रैलियों का गवाह रहा है।













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