नई दिल्ली: नगालैंड में विधानसभा चुनाव के नतीजे आने के बाद राज्य में अलग ही सियासत का खेल देखने को मिला है। देशभर में भाजपा का विरोध करने वाली शरद पवार की पार्टी एनसीपी ने नगालैंड में भाजपा गठबंधन को समर्थन दे दिया है। वहीं, जेडीयू के एकमात्र विधायक ने भी समर्थन देने का एलान किया जिसके बाद पार्टी ने अपनी राज्य इकाई भंग कर दी। जेडीयू ने कहा कि राज्य इकाई ने बिना राष्ट्रीय नेतृत्व से बात कर फैसला लिया था।
शरद पवार की हरी झंडी
एनसीपी प्रमुख शरद पवार ने नगालैंड में नेफ्यू रियो की सरकार को समर्थन देने को हरी झंडी दे दी है। दरअसल, एनसीपी की राज्य इकाई ने कहा कि उन्हें नागालैंड राज्य के व्यापक हित के लिए सरकार का हिस्सा होना चाहिए। जिसके बाद, एनसीपी महासचिव नरेंद्र वर्मा ने शरद पवार के साथ बैठक के बाद कहा कि पवार ने नगालैंड के विकास और नेफ्यू रियो के साथ अपने अच्छे संबंधों के चलते सरकार का हिस्सा बनने को फैसला किया है।
मुख्य विपक्ष हो सकता थी एनसीपी
नगालैंड में विपक्ष की ओर से एनसीपी ने सबसे बेहतर काम किया था। शरद पवार की पार्टी को 7 सीटें मिली थी और वह मुख्य विपक्ष का रोल निभा सकता था। हालांकि, पार्टी के स्थानीय नेताओं का मानना था कि उनके रियो के साथ अच्छे संबंध है और इसलिए वे सरकार का हिस्सा बन गए। फिलहाल ये स्पष्ट नहीं है कि एनसीपी बाहर से समर्थन देगी या सरकार का हिस्सा बनेगी।
महाराष्ट्र में दिख सकता असर
एनसीपी का नगालैंड में भाजपा गठबंधन के साथ मिलना महाराष्ट्र की राजनीति में भी हलचल ला सकता है। महाराष्ट्र में उद्धव की पार्टी के साथ सरकार बनाने वाली एनसीपी की अब दूरियां भी बढ़ सकती है। इसी के साथ महाराष्ट्र में शिवसेना, कांग्रेस और एनसीपी के महाविकास अघाड़ी गठबंधन को भी झटका लग सकता है।













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